FSSAI ने सुप्रीम कोर्ट में एक नया प्लान पेश किया है, जिसके तहत ज्यादा नमक, चीनी या फैट वाले पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स पर अनिवार्य रूप से लाल रंग का हेक्सागोनल (Hexagonal) वॉर्निंग लेबल लगाना होगा। यह नियम 2024 के ICMR-NIN गाइडलाइन्स पर आधारित है, जिससे बड़ी FMCG कंपनियों पर अपने प्रोडक्ट्स की रेसिपी बदलने का दबाव बढ़ सकता है।
नया नियम कैसे करेगा काम?
रेगुलेटर का मकसद उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है। जिन प्रोडक्ट्स में चीनी, सैचुरेटेड फैट या नमक तय सीमा से ज्यादा होगा, उन पर 'High Fat', 'High Sugar' या 'High Salt' के वॉर्निंग लेबल लगाने होंगे। ये मानक 2024 की ICMR-NIN गाइडलाइन्स से लिए गए हैं।
रोलआउट को दो फेज में लागू करने की योजना है। फेज-1 में उन प्रोडक्ट्स को शामिल किया जाएगा जिनमें दो या दो से ज्यादा हानिकारक तत्व हैं। फेज-2 में एक तत्व की अधिकता वाले प्रोडक्ट्स को भी इसमें जोड़ लिया जाएगा। हालांकि, घी, शहद, एडिबल ऑयल, गुड़ और कच्चे नमक जैसे सिंगल-इंग्रीडिएंट प्रोडक्ट्स को इस नियम से बाहर रखा गया है।
FMCG कंपनियों के लिए क्या हैं चुनौतियां?
बड़ी FMCG कंपनियों के लिए अब अपने प्रोडक्ट्स की रेसिपी को 'री-फॉर्म्युलेट' (Reformulate) करना मजबूरी हो सकता है ताकि वे लाल लेबल से बच सकें। अगर कंपनियां पुरानी रेसिपी के साथ आगे बढ़ती हैं, तो उन्हें 'ब्रांड परसेप्शन' और बिक्री घटने का डर सता रहा है। एक सर्वे के मुताबिक, वॉर्निंग लेबल को देखते ही अधिकतर ग्राहक अपना निर्णय बदल सकते हैं, जिससे सेल्स वॉल्यूम पर 5% से 10% तक का असर पड़ने की आशंका है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
निवेशकों को अब कंपनियों के मार्जिन और री-फॉर्म्युलेशन की लागत पर नजर रखनी चाहिए। क्या कंपनियां अपनी प्राइसिंग पावर बनाए रख पाएंगी? यह आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल होगा। रेगुलेटरी बदलाव की गति और अंतिम नोटिफिकेशन पर नजर रखना अब बेहद जरूरी हो गया है।
