FSSAI ने अब बोटैनिकल एक्सट्रैक्ट्स वाले सभी हेल्थ सप्लीमेंट्स और नूट्रास्यूटिकल्स के लिए सख्त चेतावनी लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों को भारी जुर्माने और लाइसेंस सस्पेंशन का सामना करना पड़ सकता है।
कंपनियों के लिए क्या हैं नए नियम?
FSSAI ने अब स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि जो भी उत्पाद बोटैनिकल या प्लांट-बेस्ड एक्सट्रैक्ट्स का उपयोग करते हैं, उन पर प्रमुखता से चेतावनी दी जानी चाहिए। उदाहरण के तौर पर, नीम या अन्य हर्बल सामग्री वाले सप्लीमेंट्स पर छोटे बच्चों के लिए चेतावनी लिखनी होगी, वहीं पपीता लीफ जूस जैसे उत्पादों पर गर्भावस्था के दौरान सावधानी बरतने का डिस्क्लेमर देना अनिवार्य होगा। यह कदम साल 2016 के 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स' रेगुलेशंस का हिस्सा है।
मार्जिन पर दबाव और मार्केटिंग की चुनौती
हेल्थ और वेलनेस सेक्टर की कंपनियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती है। कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक और पैकेजिंग को अपडेट करना होगा, जिससे शॉर्ट टर्म में उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, FSSAI ने साफ किया है कि कोई भी कंपनी अपने उत्पाद को 'बीमारी ठीक करने वाली दवा' बताकर मार्केटिंग नहीं कर सकती। कई ब्रांड्स इसी तरह के दावों के दम पर बिक्री बढ़ाते रहे हैं, जिस पर अब लगाम लगेगी।
निवेशकों के लिए क्या है रिस्क?
सबसे बड़ा खतरा लाइसेंस रद्द होने का है। FSSAI ने चेतावनी दी है कि 2006 के 'फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट' के तहत चूक पाए जाने पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निवेशकों को उन कंपनियों पर नजर रखने की जरूरत है जिनके पोर्टफोलियो में नूट्रास्यूटिकल्स का हिस्सा बड़ा है। नई गाइडलाइंस न केवल कंप्लायंस कॉस्ट (Compliance Cost) बढ़ाएंगी, बल्कि अब कंपनियों को मार्केटिंग का तरीका भी बदलना होगा ताकि वे बिना भ्रामक दावे किए अपनी बिक्री बरकरार रख सकें।
