FSSAI ने पैकेट बंद खाद्य पदार्थों के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब जिन प्रोडक्ट्स में शुगर, साल्ट या फैट तय सीमा से अधिक होगा, उन पर लाल रंग का वार्निंग लेबल लगाना अनिवार्य होगा। कंपनियों को इन बदलावों के लिए **1 साल** का समय दिया गया है।
FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने पैकेज्ड फूड इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा रेगुलेटरी बदलाव किया है। अब किसी भी ऐसे प्रोडक्ट, जिसमें शुगर, साल्ट या फैट की मात्रा एक निश्चित लिमिट से ज्यादा होगी, उसके सामने 'लाल रंग का हेक्सागोन' (Red Hexagon) वार्निंग सिंबल लगाना अनिवार्य होगा। यह नियम तब भी लागू होगा जब किसी प्रोडक्ट में केवल एक पोषक तत्व (Nutrient) तय सीमा से ज्यादा हो।
कंपनियों के लिए क्या है समय सीमा?
रेगुलेटर अगले 4 महीनों में इन नियमों को फाइनल करेगा। इसके बाद कंपनियों को अपने पैकेट्स पर ये बदलाव लागू करने के लिए 1 साल का समय मिलेगा। इस दायरे में Nestle India, Hindustan Unilever, Mondelez और Mars जैसी बड़ी एफएमसीजी कंपनियां सीधे तौर पर आएंगी।
निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
इन्वेस्टर्स को आने वाली तिमाहियों में इन बातों पर नजर रखनी होगी:
- ऑपरेशनल कॉस्ट: पैकेजिंग डिजाइन बदलने से कंपनियों का खर्च बढ़ेगा।
- बदलता कंज्यूमर बिहेवियर: अगर पैकेट पर रेड लेबल लगा होगा, तो ग्राहक हेल्दी विकल्प चुन सकते हैं, जिससे कुछ ब्रांड्स की सेल वॉल्यूम पर दबाव आ सकता है।
- रेसिपी में बदलाव: वार्निंग से बचने के लिए कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की रेसिपी बदल सकती हैं, जिससे रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) पर निवेश बढ़ेगा और स्वाद में भी बदलाव की संभावना होगी।
आर्टिफिशियल स्वीटनर्स के इस्तेमाल की जानकारी भी अब पैकेट के पीछे की जगह फ्रंट पर साफ-साफ देनी होगी। हालांकि 'ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन' ने इन नियमों के भारतीय फूड प्रोडक्ट्स की ग्लोबल छवि पर असर पड़ने की चिंता जताई है, लेकिन FSSAI अपने रुख पर कायम है।
