FSSAI ने दिग्गज फूड कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को **150** से ज्यादा नोटिस भेजे हैं। Nestle India और Dr. Reddy’s Laboratories जैसे बड़े नामों से उनके उत्पादों पर किए गए स्वास्थ्य संबंधी दावों का वैज्ञानिक प्रमाण मांगा गया है।
भ्रामक दावों पर रेगुलेटर सख्त
FSSAI ने हेल्थ सप्लीमेंट और FMCG सेक्टर के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ दिया है। रेगुलेटर ने 150 से ज्यादा मैन्युफैक्चरर्स और कम से कम 12 ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किए हैं। इसमें उन विज्ञापनों और लेबलिंग पर सवाल उठाए गए हैं जिनमें 'इम्यूनिटी', 'प्रोटीन' और 'मसल डेवलपमेंट' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है।
Nestle India और अन्य पर नजर
सितंबर 2026 में Nestle India के खिलाफ औपचारिक मामले शुरू होने के बाद से ही कंपनी सुर्खियों में है। कंपनी के शिशु पोषण उत्पादों, जैसे 'NAN Excella Pro Stage 1' और 'Lactogen Pro' के प्रचार पर सवाल उठे हैं। इस खबर के बाद पहले भी कंपनी के शेयरों में लगभग 3% की गिरावट देखी गई थी। हालांकि, कंपनी का दावा है कि उनके उत्पाद पूरी तरह रेगुलेटरी नियमों के अनुरूप हैं। इसके अलावा, Dr. Reddy’s Laboratories और Tirupati Wellness से भी उनके दावों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
ई-कॉमर्स कंपनियों की भी बढ़ेगी जिम्मेदारी
इस बार FSSAI ने सिर्फ कंपनियों को ही नहीं, बल्कि Amazon, Flipkart और Netmeds जैसे ऑनलाइन मार्केटप्लेस को भी घेरे में लिया है। अब इन प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी होगी कि वे अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित स्वास्थ्य संबंधी दावों की सही से जांच करें, ताकि किसी भी कानूनी मुश्किल से बचा जा सके।
निवेशकों के लिए जोखिम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा रिस्क 'ऑपरेशनल और फाइनेंशियल' है। अगर कंपनियों को अपनी पैकेजिंग या मार्केटिंग स्ट्रेटेजी बदलनी पड़ी, तो कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है और ब्रांड की इमेज पर भी असर पड़ सकता है। बाजार की नजर अब इस बात पर है कि ये कंपनियां FSSAI की मांगों का जवाब कैसे देती हैं और आने वाले समय में इनके नतीजों पर इसका क्या असर पड़ता है।
