Dabur India और Ferns N Petals पर FSSAI का शिकंजा, बदले लेबल: अब नहीं चलेंगे मिलावटी दावे!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Dabur India और Ferns N Petals पर FSSAI का शिकंजा, बदले लेबल: अब नहीं चलेंगे मिलावटी दावे!

FSSAI की सख्ती के बाद Dabur India और Ferns N Petals समेत छह बड़ी कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट्स के लेबल और मार्केटिंग दावों में सुधार किया है। रेगुलेटर की पारदर्शिता की मांग के चलते अब इंग्रेडिएंट्स का सही खुलासा और 'शुद्धता' जैसे भ्रामक दावों को हटाना अनिवार्य हो गया है, जिससे कंपनियों के परिचालन खर्च बढ़ सकते हैं।

FSSAI का एक्शन: इन कंपनियों को देना होगा नया 'पहचान'

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने मंगलवार को इस बात की पुष्टि की है कि छह कंपनियों ने नियामक जांच के बाद अपने उत्पाद लेबल और विज्ञापन सामग्री को सफलतापूर्वक ठीक कर लिया है। यह कार्रवाई रेगुलेटर द्वारा जारी किए गए नोटिस की एक श्रृंखला के बाद हुई है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्पाद विवरण, विशेष रूप से शुद्धता और स्वास्थ्य लाभ से संबंधित दावे, बेचे जा रहे सामानों की सामग्री को सटीक रूप से दर्शाएं।

Dabur India: आयुर्वेदिक तेल या खाने का तेल?

प्रमुख कंज्यूमर गुड्स कंपनी Dabur India को उसके आयुर्वेदिक औषधीय तेल के मार्केटिंग को लेकर नोटिस भेजा गया था। रेगुलेटर ने पाया कि उत्पाद को 'खाने योग्य तेल' के रूप में पेश किया जा रहा था, जो कि एक अलग श्रेणी है और जिसके लिए सुरक्षा व लेबलिंग के मानक भी अलग होते हैं। इसके जवाब में, कंपनी ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और अपनी वेबसाइट पर लिस्टिंग को अपडेट कर दिया है ताकि उत्पाद को सही ढंग से 'आयुर्वेदिक मेडिसिन' श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सके। यह कदम शहद, घी और नारियल तेल जैसे उत्पादों पर '100% शुद्धता' जैसे दावों पर नियामक कार्रवाई का हिस्सा है, जिसे FSSAI ने अविश्वसनीय करार दिया है।

Ferns N Petals: चॉकलेट पर भी 'खेला'

फूलों और उपहारों की रिटेलर Ferns N Petals को भी अपने खाद्य उत्पादों, विशेष रूप से चॉकलेट के संबंध में नियामक जांच का सामना करना पड़ा। FSSAI ने पैकेजिंग में गंभीर खामियां पाईं, जिसमें बिना उचित खुलासे के हाइड्रोजनीकृत वनस्पति वसा (hydrogenated vegetable fats) का उपयोग और अनुशंसित आहार भत्ता (RDA) प्रतिशत जैसी प्रमुख पोषण संबंधी जानकारी का उल्लेख न करना शामिल था। इसके अलावा, बादाम और आम जैसे इंग्रेडिएंट्स को उजागर करने वाली मार्केटिंग इमेजरी, पैकेजिंग पर वास्तविक सामग्री की घोषणा से मेल नहीं खा रही थी। कंपनी ने पुष्टि की है कि उसने नियामक की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी पैकेजिंग और लेबल अपडेट कर दिए हैं।

निवेशकों पर असर और ऑपरेशनल चुनौतियाँ

लेबल कंप्लायंस के लिए सख्त नियमों का यह जोर कंज्यूमर गुड्स फर्मों के लिए परिचालन चुनौतियाँ खड़ी करता है। कंपनियों को अब पुराने स्टॉक को निपटाने, नए मानकों को पूरा करने के लिए उत्पादों की री-पैकेजिंग करने और मार्केटिंग सामग्री को अपडेट करने से जुड़ी लागतों का प्रबंधन करना होगा। निवेशकों के लिए, ये घटनाएं ऐसे नियामक माहौल को उजागर करती हैं जो अस्पष्ट विज्ञापन दावों के प्रति तेजी से असहिष्णु होता जा रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, बाजार की प्रतिक्रिया ऐसे नियामक घोषणाओं के प्रति संवेदनशील रही है। जब FSSAI ने इस महीने की शुरुआत में प्रारंभिक निर्देश जारी किए थे, तो Dabur India के शेयर लगभग 4% गिर गए थे, क्योंकि बाजार ने लेबलिंग प्रतिबंधों के निहितार्थों का आकलन किया था। हालांकि कंपनियां अक्सर इन बदलावों को एक प्रक्रियागत मामला मानती हैं, लेकिन ब्रांड की छवि को नुकसान पहुंचने की संभावना और कंप्लायंस की लागतें शेयरधारकों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय बनी हुई हैं। Lotte India Corporation Pvt Ltd सहित अन्य शामिल संस्थाओं ने भी अपने लेबल से '100 प्रतिशत' के दावों को हटा दिया है, जो अधिक पारदर्शी उत्पाद लेबलिंग की ओर एक व्यापक उद्योग प्रवृत्ति का संकेत देता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.