भारत के खाद्य नियामक FSSAI ने Vatave Healthcare और Global Healthfit Retail India को उनके कुछ प्रोडक्ट्स की बिक्री रोकने का आदेश दिया है। ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि प्रोडक्ट्स पर गलत लेबलिंग और भ्रामक दावे किए गए थे। यह कदम हेल्थ सप्लीमेंट इंडस्ट्री पर बढ़ते सरकारी शिकंजे को दिखाता है।
FSSAI का Vatave Healthcare पर शिकंजा
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने Vatave Healthcare को 'Folineuro Syrup - Folinic Acid Syrup' का निर्माण, वितरण और बिक्री तुरंत बंद करने का आदेश दिया है। जांच में पाया गया कि प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर दिमाग (Brain) की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया था, जिससे यह झूठा संकेत मिल रहा था कि यह न्यूरोलॉजिकल हेल्थ को बेहतर बनाता है। यह दावा नियामक मानकों के अनुसार साबित नहीं हुआ था। FSSAI ने यह भी पाया कि कंपनी ने इस प्रोडक्ट को गलती से 'Functional Food' कैटेगरी में डाला था, जबकि भारतीय कानून के तहत ऐसी कोई कैटेगरी मौजूद नहीं है। कंपनी को चेतावनी दी गई है कि आदेश का पालन न करने पर Food Safety and Standards Act, 2006 के तहत कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
Global Healthfit Retail और Neuherbs के प्रोडक्ट्स पर भी रोक
इसी कड़ी में, Global Healthfit Retail India Pvt Ltd को भी तुरंत अपने 'Neuherbs True Vitamin' प्रोडक्ट की बिक्री बंद करने का निर्देश दिया गया है। नियामक संस्था का कहना है कि 'True Vitamin' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना ग्राहकों को गुमराह करने जैसा है। FSSAI ने साफ किया कि यह शब्दावली FSS (Labelling and Display) Regulations, 2020 या FSS (Advertising and Claims) Regulations, 2018 के तहत न तो परिभाषित है और न ही इसकी इजाजत है। कंपनी को अब 30 दिनों के भीतर एक 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' (Action Taken Report) जमा करनी होगी, जिसमें बिक्री रोकने और लेबलिंग की गड़बड़ियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों का पूरा ब्यौरा देना होगा।
न्यूट्रास्यूटिकल्स (Nutraceuticals) पर बढ़ता रेगुलेटरी दबाव
ये आदेश भारत के हेल्थ सप्लीमेंट और न्यूट्रास्यूटिकल मार्केट पर FSSAI के बढ़ते सख्त रुख को दर्शाते हैं। जैसे-जैसे भारतीय लोगों में सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और यह सेक्टर तेजी से फल-फूल रहा है, वैसे-वैसे नियामक संस्थाएं ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर नकेल कस रही हैं जो फूड सप्लीमेंट्स और दवाओं के बीच की रेखा को धुंधला करते हैं। इस फील्ड में काम कर रही कंपनियों के लिए मुख्य खतरे प्रोडक्ट रिकॉल (Product Recall), इन्वेंट्री राइट-ऑफ (Inventory Write-offs) और ब्रांड इमेज को नुकसान पहुंचना हैं। निवेशकों और संबंधित पक्षों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या ये कंपनियां नियमों का पालन करने के लिए अपने प्रोडक्ट्स को सफलतापूर्वक रीलेबल (Relabel) या रीफॉर्मूलेट (Reformulate) कर पाती हैं, या फिर ये नियामक कार्रवाई उनके प्रोडक्ट की बाजार में पकड़ को लंबे समय तक कमजोर करती है।
