खाने-पीने की चीज़ों की सुरक्षा पर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ी कार्रवाई की है। FSSAI ने मिलावट के चलते SDP Industries के सभी तरह के घी की बिक्री पर रोक लगा दी है, वहीं स्वच्छता के नियमों का पालन न करने पर Marche Retail का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया है। यह एक्शन बड़े FMCG कंपनियों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चल रहे कड़े नियमों के तहत लिया गया है।
FSSAI ने क्यों उठाया ये कदम?
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दो बड़े फूड बिजनेस पर सख्त एक्शन लिया है। New Delhi की Marche Retail Pvt Ltd का लाइसेंस 30 दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। इंस्पेक्शन के दौरान कंपनी में साफ-सफाई, फूड हैंडलर्स की ट्रेनिंग और जरूरी रिकॉर्ड रखने के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था, जो कि गंभीर खामियां हैं।
SDP Industries के घी में क्या गड़बड़ी मिली?
वहीं, Daman की SDP Industries Pvt Ltd के खिलाफ FSSAI ने एक प्रोहिबिशन ऑर्डर जारी किया है। कंपनी के 'Shraddha', 'Shree Saras', और 'Gokul' जैसे ब्रांड नामों से बिकने वाले घी के सैंपल की जांच में बीटा-सिटोस्टेरॉल और असामान्य फैटी-एसिड कंपोजीशन पाया गया। FSSAI के मुताबिक, इससे यह साबित होता है कि घी में मिलावटी वनस्पति तेल का इस्तेमाल किया गया है, जो शुद्ध घी के मानकों का उल्लंघन है। अब कंपनी को अपने यहां से इन प्रोडक्ट्स की बिक्री और वितरण तुरंत बंद करना होगा।
बड़े नामों पर भी गिरी गाज
ये दोनों एक्शन FSSAI की तरफ से चलाए जा रहे बड़े एनफोर्समेंट ड्राइव का हिस्सा हैं। खबर है कि FSSAI ने Nestle India, PepsiCo, और Coca-Cola India जैसी बड़ी कंपनियों पर भी 150 से ज़्यादा नोटिस जारी किए हैं। इन नोटिसों में भ्रामक विज्ञापन, गलत दावे और लेबलिंग की गड़बड़ियां जैसे मुद्दे शामिल हैं। इतना ही नहीं, Amazon और Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की भी जांच की गई है, जिन्हें 12 नोटिस मिले हैं और Amazon के एक वेयरहाउस का लाइसेंस भी रद्द किया गया है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इन घटनाओं से कंज्यूमर गुड्स और रिटेल सेक्टर में रेगुलेटरी रिस्क (Regulatory Risk) बढ़ता दिख रहा है। जहां SDP Industries जैसे छोटे मामलों से स्पेसिफिक प्रोडक्ट्स पर असर पड़ेगा, वहीं बड़ी कंपनियों पर FSSAI के नोटिस यह साफ करते हैं कि अब नियमों का पालन और सख्ती से किया जाएगा। रेगुलेटरी जांच बढ़ने से कंपनियों के ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Costs) में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि उन्हें सप्लाई चेन को ठीक करना होगा, लेबलिंग अपडेट करनी होगी और क्वालिटी टेस्टिंग के लिए ज़्यादा इंतजाम करने होंगे। हालांकि कई कंपनियों ने सुधार के कदम उठाने शुरू कर दिए हैं, लेकिन निवेशक भविष्य में आने वाले नतीजों पर इन खर्चों का असर देख सकते हैं। यह देखना अहम होगा कि कंपनियां कब तक इन खामियों को दूर करती हैं और क्या इससे पूरे फूड इंडस्ट्री में सप्लाई में कोई रुकावट आती है।
