FSSAI का एक्शन: राजस्थान की 3 फूड कंपनियों पर 2 महीने का बैन, प्रोडक्ट में मिली खतरनाक चीजें

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AuthorNeha Patil|Published at:
FSSAI का एक्शन: राजस्थान की 3 फूड कंपनियों पर 2 महीने का बैन, प्रोडक्ट में मिली खतरनाक चीजें

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राजस्थान की 3 फूड कंपनियों पर 2 महीने का बैन लगा दिया है। लैब टेस्ट में इनके प्रोडक्ट असुरक्षित पाए गए हैं। हालांकि ये कंपनियां प्राइवेट हैं, लेकिन इस घटना ने भारतीय फूड प्रोसेसिंग सेक्टर पर बढ़ती रेगुलेटरी सख्ती को उजागर किया है।

FSSAI ने क्यों लगाया बैन?

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने राजस्थान की तीन फूड मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। इन कंपनियों को 2 महीने के लिए मैन्युफैक्चरिंग, स्टोरेज, डिस्ट्रीब्यूशन या बिक्री से बैन कर दिया गया है। यह फैसला सेफ्टी टेस्ट के नतीजों के बाद लिया गया, जिनमें इनके कुछ प्रोडक्ट आम जनता के लिए असुरक्षित पाए गए।

किन प्रोडक्ट्स पर लगी रोक?

FSSAI ने हालिया टेस्टिंग में खतरनाक सैंपल पाए थे। इनमें Shree Shyam Foods का ग्रीन चिली सॉस, Bharat Food Products का दिल्ली डेयरी ब्रांड वाला घी और KDP Food Industry का डेयरी सारस ब्रांड वाला पनीर शामिल है। इन प्रोडक्ट्स को इंसानी इस्तेमाल के लिए बिल्कुल अनफिट पाया गया। जयपुर और अलवर के पब्लिक हेल्थ लैब्स में हुई जांच के बाद इन प्रोडक्ट्स को तुरंत रिटेल शेल्फ्स और वेयरहाउस से वापस मंगाने का आदेश दिया गया है।

अन्य राज्यों में भी कार्रवाई

सिर्फ राजस्थान ही नहीं, FSSAI ने क्वालिटी वायलेशन के लिए दूसरे राज्यों में भी फूड बिजनेस पर पेनल्टी लगाई है। कर्नाटक में Dharwad Mishra Pedha को 267.05 mg/kg टार्ट्राज़ीन के इस्तेमाल के लिए जुर्माना भरना पड़ा, जो कि 100 mg/kg की तय लिमिट से कहीं ज्यादा है। इसी तरह, गुजरात की Shree Chemfood Pvt. Ltd. को घटिया क्वालिटी वाला आयोडीन युक्त नमक सप्लाई करने पर पेनल्टी लगी। यह नमक सोडियम क्लोराइड और आयोडीन की क्वालिटी स्टैंडर्ड्स पर खरा नहीं उतरा और इसे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत मिसब्रांडेड भी पाया गया।

निवेशकों के लिए क्या है मतलब?

भारतीय फूड प्रोसेसिंग और FMCG सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए यह जानना जरूरी है कि जिन कंपनियों पर यह एक्शन लिया गया है, वे सभी प्राइवेट हैं और स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं हैं। इसलिए, इन घटनाओं का सीधे तौर पर लिस्टेड फूड कंपनियों के शेयर भाव पर कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, यह घटना फूड रेगुलेटर द्वारा क्वालिटी मॉनिटरिंग में लगातार हो रही सख्ती को दिखाती है। FSSAI की बढ़ती सख्ती का मतलब है कि सभी फूड ऑपरेटर्स, जिनमें बड़ी लिस्टेड कंपनियां भी शामिल हैं, को क्वालिटी कंट्रोल और सप्लाई चेन इंटीग्रिटी पर और ज्यादा ध्यान देना होगा ताकि रेगुलेटरी नॉन-कंप्लायंस से होने वाले रेपुटेशनल और फाइनेंशियल रिस्क से बचा जा सके।

बैन झेल रही कंपनियों को सुधारात्मक उपाय करने होंगे और ऑपरेशन फिर से शुरू करने के लिए कंप्लायंस का सर्टिफिकेट लेना होगा। रेगुलेटर ने यह भी संकेत दिया है कि सेफ्टी स्टैंडर्ड्स को पूरा न करने पर बैन की अवधि बढ़ाई जा सकती है। यह इंडस्ट्री में मजबूत फूड सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम की जरूरत पर जोर देता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.