FMCG कंपनियों के लिए मुसीबत बढ़ गई है। प्लास्टिक पैकेजिंग की रॉ मटेरियल कॉस्ट में **20%** का उछाल आया है, जो कुल प्रोडक्ट खर्च का **25%** तक हिस्सा है। कंपनियां मार्जिन बचाने के लिए पैक साइज कम करने जैसे तरीके अपना रही हैं, लेकिन नवंबर के मध्य तक सामान महंगा होने के आसार हैं।
भारत की एफएमसीजी (FMCG) कंपनियां इन दिनों प्लास्टिक रॉ मटेरियल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी से जूझ रही हैं। पिछले तीन हफ्तों में रेजिन जैसी जरूरी चीजों के दाम लगभग 20% बढ़ चुके हैं, जो अब प्री-वॉर लेवल से 60% ऊपर पहुंच गए हैं। एफएमसीजी सेक्टर में पैकेजिंग की लागत कुल खर्च का 15% से 25% तक होती है, इसलिए यह सीधे तौर पर मुनाफे (Profit) को प्रभावित कर रही है।\n\n### कंपनियां कैसे कर रही हैं बचाव?\n\nकंपनियां फिलहाल ग्राहकों को कीमतों में बढ़ोतरी का झटका नहीं देना चाहतीं। इसके लिए वे 'ग्रामेज रिडक्शन' का सहारा ले रही हैं, यानी पैकेट के अंदर सामान की मात्रा कम कर दी जाती है जबकि MRP वही रहती है। इसके अलावा, पैकेजिंग डिजाइन में बदलाव करके प्लास्टिक का इस्तेमाल घटाने की कोशिशें भी जारी हैं। Prataap Snacks ने माना है कि छोटे डिजाइन बदलाव से लागत का कुछ बोझ कम हो सकता है, लेकिन इसमें समय काफी लगता है।\n\n### दिवाली के बाद बढ़ेगी महंगाई?\n\nफेस्टिव सीजन के कारण कंपनियां फिलहाल इन अतिरिक्त लागतों को खुद सह रही हैं। हालांकि, जानकारों का मानना है कि दिवाली के बाद यानी नवंबर के मध्य से घरेलू सामान और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की कीमतों में इजाफा हो सकता है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम\n\nनिवेशकों के लिए स्थिति थोड़ी चुनौतीपूर्ण है। यदि कंपनियां लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डालती हैं, तो उनके मार्जिन कम हो जाएंगे। वहीं, अगर वे दाम बढ़ाती हैं, तो मांग में कमी का डर रहेगा। आने वाली तिमाहियों के नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा कि कैसे वे अपने मार्केट शेयर को सुरक्षित रखते हुए इन इनपुट कॉस्ट को मैनेज करते हैं।
