FMCG सेक्टर में बड़ी मुसीबत सामने आई है। 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, नए डिस्ट्रीब्यूटरों के लगभग **10%** आवेदन अनिवार्य FSSAI सेफ्टी नॉर्म्स को पूरा करने में नाकाम रहे हैं। यह स्थिति बड़ी कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के लिए सप्लाई चेन में बड़ा जोखिम खड़ा कर रही है।
भारत में एफएमसीजी (FMCG) कंपनियों के लिए अपना डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क बढ़ाना अब बड़ी चुनौती बन गया है। वेरिफिकेशन फर्म AuthBridge की 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 3,500 आवेदनों की जांच की गई, जिसमें पाया गया कि 9.8% आवेदक FSSAI द्वारा तय मानकों पर खरे नहीं उतरे।
सख्त FSSAI नियमों का असर
1 अप्रैल, 2026 से FSSAI ने रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन और टर्नओवर थ्रेशोल्ड जैसे कड़े सुधार लागू किए हैं। कई डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास एक्सपायर्ड फूड लाइसेंस पाए गए हैं, तो कई ने गलत या जाली दस्तावेज जमा किए थे। कंपनियों के लिए रिस्क यह है कि अगर उनका डिस्ट्रीब्यूटर नियमों का पालन नहीं करता, तो ब्रांड ओनर को भारी जुर्माने और प्रोडक्ट रिकॉल जैसी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
GST और पहचान से जुड़े जोखिम
सिर्फ फूड सेफ्टी ही नहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। ऑडिट में पाया गया कि 8% आवेदनों में PAN और GST डेटा मैच नहीं हो रहे थे, जबकि 4.5% आवेदकों के GST रजिस्ट्रेशन पहले ही रद्द हो चुके थे। इस तरह के 'ट्रेड आइडेंटिटी फ्रॉड' के चलते पैरेंट कंपनियों को टैक्स लिटिगेशन और क्रेडिट मिसयूज़ का सामना करना पड़ सकता है।
घटता मार्जिन और बढ़ता दबाव
All India Consumer Products Distributors Federation (AICPDF) के अनुसार, डिस्ट्रीब्यूटर्स का मार्जिन पहले ही 3.5% से 5% के बीच सिमट गया है, जो बढ़ती लॉजिस्टिक्स और फ्यूल कॉस्ट के कारण अस्थिर हो रहा है। ऐसे में मार्जिन बचाने के चक्कर में डिस्ट्रीब्यूटर अनुपालन (Compliance) के साथ समझौता करने लगे हैं। अब कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे कड़े वेरिफिकेशन पर खर्च बढ़ाएं या फिर गलत डिस्ट्रीब्यूटर्स के कारण होने वाले कानूनी और ब्रांड इमेज के नुकसान को झेलें। निवेशकों को अब कंज्यूमर गुड्स कंपनियों की आने वाली रिपोर्टों पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे वे अपनी डिस्ट्रीब्यूशन स्ट्रैटेजी में इन बढ़ते जोखिमों को मैनेज कर रही हैं।
