एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि FMCG सेक्टर में करीब **10%** डिस्ट्रीब्यूटर आवेदन FSSAI वेरिफिकेशन में फेल हो गए हैं। GST विसंगतियों और धोखाधड़ी के मामलों ने कंपनियों के सामने बड़े ऑपरेशनल रिस्क खड़े कर दिए हैं।
वेरिफिकेशन में फेल हो रहे डिस्ट्रीब्यूटर्स
AuthBridge की एक रिपोर्ट ने देश की दिग्गज FMCG कंपनियों के डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क की पोल खोल दी है। आंकड़ों के मुताबिक, 9.8% नए डिस्ट्रीब्यूटर आवेदन FSSAI के अनिवार्य वेरिफिकेशन को पास नहीं कर सके हैं। यह उन मैन्युफैक्चरर्स के लिए एक बड़ा झटका है जो अपने उत्पादों को फैक्ट्री से रिटेल दुकानों तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह से इन थर्ड-पार्टी पार्टनर्स पर निर्भर रहते हैं।
GST और फ्रॉड की समस्या
नियामक चुनौतियां केवल फूड सेफ्टी तक सीमित नहीं हैं। विश्लेषण से पता चलता है कि 8% आवेदनों में 'आइडेंटिटी मिसमैच' पाया गया, जबकि 4.5% आवेदक GST अनुपालन मानकों को पूरा करने में विफल रहे। कई मामलों में, डिस्ट्रीब्यूटर रद्द हो चुके रजिस्ट्रेशन या दूसरे राज्यों के क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहाँ तक कि 'ट्रेड आइडेंटिटी फ्रॉड' के भी मामले सामने आए हैं, जहाँ शेल कंपनियां किसी दूसरी फर्म के टैक्स क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल कर रही हैं।
निवेशकों के लिए चेतावनी
निवेशकों के लिए यह सिर्फ कागजी कार्रवाई की समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर ऑपरेशनल और फाइनेंशियल रिस्क से जुड़ी है। जब डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी पहचान छुपाते हैं या अवैध कागजों का उपयोग करते हैं, तो सप्लाई चेन की विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। इसके अलावा, वर्किंग कैपिटल के दुरुपयोग और बैड डेट (Bad Debt) बढ़ने का खतरा भी मैन्युफैक्चरर्स के लिए सिरदर्द बना हुआ है।
भविष्य की राह: कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग
FSSAI जैसी सरकारी एजेंसियां अब सख्त रुख अपना रही हैं। ब्रांड्स की छवि और प्रॉफिट मार्जिन को बचाने के लिए, इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स अब 'वन-टाइम चेक' की जगह 'कंटीन्यूअस मॉनिटरिंग' की सलाह दे रहे हैं। आने वाले समय में निवेशकों को कंपनियों की मैनेजमेंट कमेंट्री पर नजर रखनी चाहिए कि वे अपने चैनल पार्टनर्स की पारदर्शिता और ड्यू डिलिजेंस के लिए क्या ठोस कदम उठा रही हैं।
