FMCG कंपनियों की बदली रणनीति: रूरल डिमांड बढ़ने से 'वैल्यू पैक्स' पर फोकस, शेयर बाजार को क्या उम्मीद?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FMCG कंपनियों की बदली रणनीति: रूरल डिमांड बढ़ने से 'वैल्यू पैक्स' पर फोकस, शेयर बाजार को क्या उम्मीद?
Overview

देश की बड़ी FMCG कंपनियां एक बार फिर 'वैल्यू पैक्स' यानी छोटे और सस्ते पैकेट वाले प्रोडक्ट्स पर ज़ोर दे रही हैं। यह हाल के 'प्रीमियम' प्रोडक्ट्स पर फोकस की रणनीति से बड़ा बदलाव है। दिसंबर से शुरू हुए इस ट्रेंड की वजह ग्रामीण इलाकों में मांग का धीरे-धीरे लौटना और GST दरों में कटौती को बताया जा रहा है।

'वैल्यू' की वापसी: अब प्रीमियम से सस्ता, वॉल्यूम पर जोर!

पिछले करीब 6 सालों से जहां कंज्यूमर गुड्स कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स को 'प्रीमियम' बनाने और ऊंची कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर ध्यान दे रही थीं, वहीं अब उन्होंने अपनी रणनीति में बड़ा फेरबदल किया है। अब फोकस एंट्री-लेवल प्रोडक्ट्स और छोटे साइज वाले पैक्स पर वापस आ गया है। दिसंबर से ही ग्रामीण इलाकों और कम आय वाले ग्राहकों के बीच मांग में थोड़ी जान आती दिखी है, जिसे भुनाने के लिए कंपनियां छोटे SKUs (Stock Keeping Units) और वैल्यू-फोकस्ड यानी कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स को दोबारा बाज़ार में ला रही हैं। सितंबर 2025 में होने वाली GST दर कटौतियां भी रोजमर्रा के इस्तेमाल और गैर-ज़रूरी सामानों के लिए इन अफोर्डेबल (Affordable) यानी सस्ती रणनीतियों को और फायदेमंद बना रही हैं।

वॉल्यूम ग्रोथ: नई प्राथमिकता!

कंपनियां अब ग्राहक की जेब का ध्यान रखते हुए अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को बदल रही हैं। Emami जैसी कंपनियां अपने मेल ग्रूमिंग ब्रांड्स में शैम्पू सैशे (Sachets) और अन्य छोटे SKUs को प्राथमिकता दे रही हैं, ताकि ग्रामीण बाज़ार की वापसी का फायदा उठा सकें। LG Electronics India नए एंट्री-सेगमेंट लाइन्स के साथ पहली बार खरीदने वाले ग्राहकों को टारगेट कर रही है और 9 सालों बाद फिक्स्ड-SPEED एयर कंडीशनर सेगमेंट में वापस लौटी है, जिसका मकसद ज्यादा से ज्यादा वॉल्यूम हासिल करना है। वहीं, Varun Beverages ने पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी भारत जैसे पूर्वी बाजारों में ₹10 वाले पैक लॉन्च किए हैं। Dabur ने ₹100 वाले ऑफर्स के साथ-साथ ₹10, ₹20 और ₹50 के कई नए पैक पेश किए हैं। Hindustan Unilever ने भी सर्फ एक्सेल डिटर्जेंट का ₹99 वाला पैक लॉन्च किया है, ताकि नए ग्राहकों को जोड़ा जा सके। Colgate-Palmolive (India) ने भी अपने प्रीमियम टूथ व्हाइटनिंग रेंज के लिए छोटे पैक्स पेश किए हैं, जिससे यह साफ है कि इंडस्ट्री वैल्यू और प्रीमियम, दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।

इंडस्ट्री की वित्तीय स्थिति और सेक्टर की तुलना

FMCG सेक्टर, जिसे Nifty FMCG इंडेक्स से दर्शाया जाता है, में फोकस का यह बदलाव कंपनियों के वैल्यूएशन (Valuation) पर भी असर डाल रहा है। फरवरी 2026 की शुरुआत तक, प्रमुख कंपनियों के P/E रेश्यो (Price-to-Earnings Ratio) कुछ इस तरह रहे: Emami करीब 26.0x, Dabur India 49.93x, Colgate-Palmolive (India) 43.51x, Hindustan Unilever 48.95x, और Varun Beverages 50.80x पर ट्रेड कर रहे थे। LG Electronics India का P/E रेश्यो लगभग 47.5x है। वहीं, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (Consumer Durables) सेक्टर का BSE कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स 63.2x के P/E पर कारोबार कर रहा है। Havells India जैसे कंपीटर्स (Competitors) 56.8x और IFB Industries 41.45x के P/E के साथ इसी वैल्यूएशन रेंज में हैं।

संरचनात्मक कमजोरियां: मार्जिन पर दबाव?

भले ही अफोर्डेबिलिटी और छोटे पैक्स पर वापस लौटना वॉल्यूम बढ़ाने के लिए एक ज़रूरी कदम है, लेकिन इसमें मार्जिन (Margin) में कमी का जोखिम भी है। कंपनियां पिछले कई सालों से प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर रही थीं, जिनसे प्रति यूनिट मार्जिन ज्यादा होता था। अब वैल्यू पैक्स पर फोकस करने का मतलब है कि वॉल्यूम ग्रोथ के लिए मार्जिन का कुछ त्याग करना पड़ सकता है। इस रणनीति की सफलता ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) और इकोनॉमीज़ ऑफ स्केल (Economies of Scale) पर निर्भर करेगी ताकि कम प्रति-यूनिट लाभ की भरपाई की जा सके। FMCG और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर लंबे समय से वॉल्यूम में धीमी गति से जूझ रहे थे, ऐसे में वैल्यू पैक्स पर लौटना एक बचाव वाली रणनीति है, न कि आक्रामक ग्रोथ की।

भविष्य का नज़ारा

इंडस्ट्री के एग्जीक्यूटिव्स (Executives) का अनुमान है कि अगले क्वार्टर (Quarter) से रूरल और अर्बन (Urban) दोनों मार्केट्स में सेल्स वॉल्यूम ग्रोथ में सुधार दिखेगा। सितंबर 2025 से लागू होने वाली GST दर में कटौती से कंजम्पशन (Consumption) को गति मिलने की उम्मीद है। एनालिस्ट्स (Analysts) 2026 में FMCG सेक्टर के लिए हाई सिंगल-डिजिट (High Single-Digit) वॉल्यूम ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं, जिसके पीछे घटती महंगाई, स्थिर कमोडिटी कीमतें और सरकारी नीतियां हैं। हालांकि, कंपनियों की वॉल्यूम ग्रोथ को वास्तविक प्रॉफिट ग्रोथ में बदलने की क्षमता लागत प्रबंधन (Cost Management) और वैल्यू ऑफर्स के बावजूद प्राइसिंग पावर (Pricing Power) बनाए रखने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी। भविष्य की रणनीति में अफोर्डेबिलिटी के जरिए बड़े मार्केट में पैठ बनाने के साथ-साथ सिलेक्टिव प्रीमियम सेगमेंट्स को भी नर्चर (Nurture) करना शामिल हो सकता है।

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