भारतीय FMCG कंपनियां फाइनेंशियल ईयर 2027 की दूसरी तिमाही में चुनौतियों का सामना कर रही हैं। कच्चे माल की लागत, विशेष रूप से चीनी की कीमतों में **38%** का उछाल कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भारी पड़ रहा है।
भारतीय कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के लिए फाइनेंशियल ईयर 2027 की शुरुआत थोड़ी मुश्किल रही है। ब्रोकरेज फर्म Nomura की रिपोर्ट के अनुसार, FMCG सेक्टर का प्रॉफिट मार्जिन दबाव में है, क्योंकि इस साल की गई कीमतों में बढ़ोतरी कच्चे माल की बढ़ती लागत के मुकाबले कम साबित हो रही है।\n\n### चीनी की महंगाई का असर\nइंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी चुनौती चीनी की कीमतों में आई भारी तेजी है। अगस्त 2026 के अंत तक भारत में खुदरा चीनी की कीमतें लगभग ₹64.24 प्रति किलो तक पहुंच गई हैं, जो सालाना आधार पर 38% ज्यादा हैं। Britannia Industries जैसी कंपनियां, जो चीनी और पाम ऑयल पर काफी निर्भर हैं, उन्हें इस कमोडिटी इन्फ्लेशन का सीधा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।\n\n### सरकारी हस्तक्षेप और सप्लाई\nबाजार को स्थिर करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है, जो 31 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी है। इसके साथ ही 1 सितंबर 2026 से नया नियम लागू हुआ है, जिसमें बल्क कंज्यूमर्स 15 दिनों से ज्यादा का स्टॉक नहीं रख सकते। यह कदम होर्डिंग रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे कंपनियों की इन्वेंट्री मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी पर असर पड़ सकता है।\n\n### पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की मार\nचीनी के अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स की लागत भी ऊंची बनी हुई है। कंपनियां इस दुविधा में हैं कि क्या वे इन बढ़ी हुई लागतों का बोझ ग्राहकों पर डालें या मार्केट शेयर खोने का जोखिम उठाएं।\n\n### आगे की राह\nहालांकि, स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन विश्लेषक फाइनेंशियल ईयर 2027 की तीसरी तिमाही से सुधार की उम्मीद कर रहे हैं। वहीं, Marico जैसी कंपनियों को कोपरा की कीमतों में राहत मिलने से कुछ हद तक सपोर्ट मिल रहा है। निवेशकों की नजरें अब कमोडिटी ट्रेंड्स और कंज्यूमर डिमांड पर टिकी हैं।
