भारत में FMCG कंपनियां इस साल के दूसरे हिस्से में कुछ सतर्क रुख के साथ उतर रही हैं। मॉनसून में अनिश्चितता और अल नीनो का असर ग्रामीण आय और कृषि उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है।
मॉनसून पर FMCG कंपनियों की नजर
भारत में FMCG यानी फास्ट-मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियां साल के दूसरे हाफ (अर्धवर्ष) में थोड़ी सतर्कता के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह मॉनसून का अनिश्चित रुख और अल नीनो (El Nino) का खतरा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई की शुरुआत में बारिश के वितरण में कुछ सुधार देखा गया है, लेकिन मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून का यह सक्रिय दौर धीमा पड़ सकता है, जिससे अहम बुवाई वाले इलाकों में पानी की कमी हो सकती है।
ग्रामीण मांग पर असर
देश की आर्थिक स्थिति पहले से ही दबाव में दिख रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार, मई में खुदरा खाद्य महंगाई (food inflation) बढ़कर 4.78% हो गई है। ऐसे में, ग्रामीण इलाकों में महंगाई का बढ़ना कंजम्पशन (उपभोग) के लिए एक चुनौतीपूर्ण माहौल बना रहा है। यह समझना जरूरी है कि प्रमुख कंज्यूमर स्टेपल कंपनियों के कुल रेवेन्यू (राजस्व) में ग्रामीण बाजारों का योगदान 30% से 45% तक होता है। इसलिए, किसानों की आय में कोई भी बड़ी गिरावट मैनेजमेंट टीमों के लिए चिंता का विषय है।
कंपनियों की रणनीति और रेटिंग एजेंसियों की राय
S&P Global जैसी ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था सूखे मौसम और खेती की लागत बढ़ने जैसी दोहरी चुनौतियों का सामना कर रही है। CareEdge Ratings का अनुमान है कि इस फाइनेंशियल ईयर (वित्तीय वर्ष) में मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण खाद्य महंगाई औसतन 6% के आसपास रह सकती है। यह महंगाई ग्रामीण इलाकों में लोगों की खरीदने की क्षमता को सीधे प्रभावित करती है, क्योंकि वहां खर्च सीधे फसल की सफलता पर निर्भर करता है।
इस जोखिम को कम करने के लिए FMCG कंपनियां अपने पोर्टफोलियो को संतुलित कर रही हैं। डाबर (Dabur) जैसी बड़ी कंपनियां अभी 'वेट एंड वॉच' (wait-and-watch) यानी 'देखो और इंतजार करो' की रणनीति पर हैं। उनका कहना है कि फिलहाल ग्रामीण मांग शहरी सेगमेंट से बेहतर प्रदर्शन कर रही है, लेकिन वे मौसम में होने वाले बदलावों पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। इसी तरह, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Godrej Consumer Products) का कहना है कि उनके भौगोलिक फैलाव और विविध प्रोडक्ट रेंज से कुछ हद तक सुरक्षा मिलती है, लेकिन वे सप्लाई चेन और मांग में संभावित रुकावटों को लेकर सतर्क हैं। कीमतों के प्रति संवेदनशील ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए, नेस्ले इंडिया (Nestle India) जैसी कुछ कंपनियों ने ₹5, ₹10 और ₹15 के एंट्री-लेवल प्राइस पॉइंट पर लोकप्रिय आइटम्स को सुलभ बनाए रखने के लिए प्रोडक्ट के ग्रामेज (वजन) को एडजस्ट करना शुरू कर दिया है।
क्षेत्रीय असमानता और सेक्टर की संवेदनशीलता
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, देश भर में बारिश अभी भी असमान है। मध्य क्षेत्रों में पानी की कमी कम हुई है, वहीं उत्तर-पूर्व और उत्तर-पश्चिम के कुछ हिस्सों में औसत से कम बारिश हो रही है। यह क्षेत्रीय असमानता बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कृषि उत्पादन और उसके बाद ग्रामीण उपभोग अक्सर स्थानीय मॉनसून के प्रदर्शन को दर्शाता है। एनालिस्ट्स का मानना है कि सामान्य बारिश के औसत से हर 1% के विचलन पर, ग्रामीण उपभोग की वृद्धि में 0.5% से 0.7% तक की मंदी का खतरा है। निवेशक आने वाले हफ्तों में मॉनसून की प्रगति पर बारीकी से नजर रखेंगे, साथ ही ग्रामीण बिक्री वृद्धि और कमोडिटी लागत के रुझानों पर मैनेजमेंट की टिप्पणियों को भी ध्यान में रखेंगे, ताकि साल के बाकी बचे समय में सेक्टर के प्रदर्शन का अंदाजा लगाया जा सके।
