इस साल अप्रैल से जून तिमाही में भारतीय FMCG और व्हाइट गुड्स कंपनियों की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल आया है। भीषण गर्मी के कारण गर्मियों में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ी। कंपनियों ने बढ़ाई कीमतों और कम हुए इनपुट कॉस्ट से प्रॉफिट बढ़ाया, लेकिन अब वे महंगाई और मानसून के जोखिमों से जूझ रही हैं।
क्या हुआ इस तिमाही?
अप्रैल से जून की तिमाही में भारत की कंज्यूमर गुड्स (FMCG) और व्हाइट गुड्स कंपनियों की बिक्री में ज़बरदस्त तेजी देखी गई। देश भर में पड़ी भीषण गर्मी ने इस सेक्टर को खूब फायदा पहुंचाया। कंपनियां, खास कर जो गर्मी में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स बनाती हैं, उन्होंने अपनी बिक्री में डबल-डिजिट की ग्रोथ दर्ज की। ठंडा रखने वाले अप्लायंसेज, कोल्ड ड्रिंक्स और पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स की डिमांड आसमान छू गई, क्योंकि लोग गर्मी से राहत पाने के तरीके खोज रहे थे।
कैसे बढ़ाया कंपनियों ने मुनाफा?
कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद, कई FMCG कंपनियों ने अपनी कीमतों में 2% से लेकर 11% तक का इजाफा किया। उदाहरण के लिए, पेंट और स्पेशलिटी केमिकल बनाने वाली Pidilite जैसी कंपनियों ने बढ़ती लागत को संभालने के लिए कीमतों में अच्छा खासा इज़ाफ़ा किया। वहीं, Marico जैसी कंपनियों ने वॉल्यूम ग्रोथ और कोपरा जैसे कच्चे माल की कीमतों में गिरावट का फायदा उठाया, जिससे उनके ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार हुआ।
रिटेलर्स की बिक्री में भी उछाल
इसी दौरान, वैल्यू फैशन रिटेलर्स ने भी शानदार परफॉरमेंस दिखाई। V-Mart Retail की रेवेन्यू में 23% की बढ़ोतरी हुई, जबकि V2 Retail में 58% का ज़बरदस्त उछाल दर्ज किया गया। व्हाइट गुड्स सेक्टर में, एयर कंडीशनिंग मार्केट के बड़े खिलाड़ी Voltas ने रिकॉर्ड एक मिलियन यूनिट्स की बिक्री की। कंपनी को उम्मीद है कि इस वॉल्यूम ग्रोथ से तिमाही के ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार होगा।
निवेशक क्यों देख रहे हैं महंगाई और मानसून पर?
तिमाही नतीजों के बावजूद, इंडस्ट्री अभी भी थोड़ी सतर्क है। वेस्ट एशिया के संकट के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटों ने पैकेजिंग मटेरियल और शिपिंग की लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा, एक्सपर्ट्स और कंपनी लीडरशिप El Nino के कारण आने वाले मानसून पर भी नजर रख रहे हैं। अगर मानसून कमजोर रहा या देर से आया, तो ग्रामीण मांग पर असर पड़ सकता है, जो FMCG सेक्टर के लिए एक बड़ा आधार है। वहीं, गर्मी के कारण कुछ प्रोडक्ट्स जैसे चाय और बिस्किट की मांग में भी कमी देखी गई है।
आगे क्या देखें निवेशक?
निवेशक आने वाली तिमाही रिपोर्ट्स पर ध्यान देंगे कि क्या वॉल्यूम ग्रोथ बनी रहती है या कीमतों के कारण हुई रेवेन्यू ग्रोथ धीमी पड़ने लगती है। ग्रामीण मांग की रिकवरी, कीमतों में बढ़ोतरी का कंज्यूमर खर्च पर असर, और मानसून का बिक्री पर प्रभाव, ये कुछ ऐसी चीजें हैं जिन पर बारीकी से नजर रखनी होगी। साथ ही, कमोडिटी की कीमतों, जैसे क्रूड ऑयल और पाम ऑयल, पर नजर रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या मार्जिन में हुई यह बढ़ोतरी पूरे फाइनेंशियल ईयर तक बनी रह सकती है।
