FIFA World Cup का फाइनल नजदीक आते ही भारत में रिटेलर्स और रेस्टोरेंट चेन्स की बिक्री में ज़बरदस्त उछाल देखा जा रहा है। टीवी निर्माताओं की मानें तो बड़े स्क्रीन वाले टीवी की मांग **30-40%** बढ़ गई है, वहीं Speciality Restaurants और Ironhill India जैसे हॉस्पिटैलिटी ग्रुप्स ने वीकेंड रेवेन्यू बढ़ाने के लिए अपने ऑपरेटिंग घंटे बढ़ा लिए हैं।
टीवी की बिक्री पर असर
FIFA World Cup फाइनल के रोमांच ने कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड्स की बिक्री में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज कराई है। पिछले कुछ दिनों में 55 इंच या उससे बड़े टीवी सेट्स की मांग में 30-40% का इजाफा हुआ है। Hisense India ने तो सेमी-फाइनल मैचों के बाद से बिक्री में 40% से ज्यादा की बढ़ोतरी बताई है, जिसके पीछे कैशबैक ऑफर्स और आसान EMI प्लान्स का बड़ा हाथ है। टीवी निर्माताओं के लिए यह एक मौसमी मौका है जब वे प्रीमियम स्टॉक को खपा सकते हैं, क्योंकि बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स के लिए ग्राहक बड़ी स्क्रीन वाले टीवी को तरजीह दे रहे हैं।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की तैयारी
रेस्टोरेंट चेन्स देर रात तक चलने वाले मैचों के लिए अपनी सेवाएं बढ़ा रही हैं। Speciality Restaurants, जो Mainland China और Oh! Calcutta जैसे ब्रांड्स चलाता है, ने अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी चुकाकर अपने लिकर लाइसेंस को रात 3 बजे तक बढ़ाने में सफलता पाई है। साथ ही, देर रात की होम डिलीवरी की उम्मीदों को पूरा करने के लिए किचन 4 बजे तक खुले रहेंगे। इसी तरह, माइक्रो-ब्रूअरी चेन Ironhill India ने एडवांस बुकिंग में भारी उछाल की सूचना दी है। मैनेजमेंट का अनुमान है कि ऑपरेटिंग घंटे बढ़ाने से वीकेंड की बिक्री सामान्य वीकेंड के मुकाबले लगभग 1.5 गुना तक पहुंच सकती है।
हालांकि, यह मांग सभी के लिए एक समान फायदेमंद नहीं रही है। Impresario Entertainment & Hospitality, जो Social रेस्टोरेंट चेन चलाता है, को चुनिंदा लोकेशन्स पर फुटफॉल में 5-10% की बढ़ोतरी की उम्मीद है। Massive Restaurants जैसे कुछ ऑपरेटर्स ने माना है कि शुरुआती राउंड की तुलना में नॉकआउट स्टेज में वित्तीय लाभ ज्यादा केंद्रित रहा, क्योंकि टूर्नामेंट के अंतिम पड़ाव पर ग्राहकों की दिलचस्पी सबसे ज्यादा होती है।
निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें
यह बूम भले ही रेवेन्यू में अल्पकालिक वृद्धि दे रहा हो, लेकिन निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इसके साथ लागतें भी बढ़ रही हैं। एक्सटेंडेड लाइसेंस के लिए अतिरिक्त एक्साइज फीस, देर रात की शिफ्ट के लिए बढ़े हुए स्टाफ का खर्च और स्पेशल मैच-डे ऑफर्स के लिए मार्केटिंग पर होने वाला खर्च प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाल सकता है। भविष्य में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह एक बार का खर्च ग्राहकों की रुचि को बनाए रखने में कामयाब होता है या यह केवल इन हाई-प्रोफाइल स्पोर्ट्स वीकेंड्स तक ही सीमित रहता है। इसके अलावा, टीवी निर्माताओं के लिए इन प्रमोशनल इवेंट्स की प्रभावशीलता पर नजर रखने से यह समझने में मदद मिलेगी कि कंपनियां प्रतिस्पर्धी बाजार में स्टॉक क्लियर करने के लिए बड़े स्पोर्ट्स कैलेंडर का कैसे फायदा उठाती हैं।
