FMCG कंपनी Emami ने जून तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट **15%** घटकर **₹139 करोड़** रह गया है। बढ़ती लागत और सप्लाई चेन में रुकावटों का असर मुनाफे पर साफ दिखा है। हालांकि, डोमेस्टिक डिमांड में मजबूती के चलते रेवेन्यू में **15%** की बढ़त दर्ज की गई।
नतीजों पर लागत का भारी असर
Emami, जो भारत की जानी-मानी FMCG कंपनी है, ने पहली तिमाही (30 जून को समाप्त) के लिए ₹138.94 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट दर्ज किया है। पिछले साल की इसी अवधि में यह आंकड़ा ₹164.26 करोड़ था। यह 15% की गिरावट दिखाती है कि कैसे बढ़ती लागतें कंज्यूमर गुड्स कंपनियों के मुनाफे पर असर डाल रही हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और क्रूड ऑयल से जुड़ी चीजों के महंगे होने के कारण प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बढ़ा है।
रेवेन्यू में उछाल, मार्जिन पर दबाव
हालांकि नेट प्रॉफिट में गिरावट आई, लेकिन कंपनी के टॉप-लाइन यानी रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ दिखी। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 15% बढ़कर ₹1,039.21 करोड़ हो गया, जो पिछले साल ₹904.09 करोड़ था। इस रेवेन्यू ग्रोथ की मुख्य वजह डोमेस्टिक मार्केट में शानदार प्रदर्शन रहा, जहां बिजनेस 20% बढ़कर ₹911.96 करोड़ तक पहुंच गया। वहीं, स्टैंडअलोन नतीजों में नेट प्रॉफिट 12% बढ़कर ₹182.22 करोड़ रहा, जिससे लगता है कि कंसोलिडेटेड नतीजों पर कुछ बाहरी फैक्टर्स का खास असर पड़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चुनौतियां
कंपनी के कुल खर्चों में इस तिमाही में करीब 18% की बढ़ोतरी हुई और यह ₹813.03 करोड़ पर पहुंच गया। इसका मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती लागत और विज्ञापन व सेल्स प्रमोशन पर ज्यादा खर्च रहा। इसके चलते, ग्रॉस मार्जिन 360 बेसिस पॉइंट घटकर 65.8% रह गया। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस को भी झटके लगे, जहां रेवेन्यू में करीब 10% की गिरावट आई और यह ₹127.25 करोड़ रहा। कंपनी ने सीधे तौर पर वेस्ट एशिया में चल रहे संघर्ष को इसका कारण बताया है, जिससे उन इलाकों में ऑर्डर्स की सप्लाई में रुकावटें आईं।
नए अधिग्रहण और विस्तार
Emami अपने बिजनेस का विस्तार करने के लिए स्ट्रैटेजिक अधिग्रहण पर भी जोर दे रही है। कंपनी ने हाल ही में Axiom Ayurveda में कंट्रोलिंग स्टेक के लिए ₹100 करोड़ की पहली पेमेंट पूरी की है। साथ ही, IncNut Digital में 60% स्टेक ₹320.99 करोड़ में खरीदा है। ये कदम कंपनी के पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हैं। Emami के प्रोडक्ट्स ग्राहकों तक पहुंचने के तरीकों में भी बदलाव देख रही है, जहां ऑर्गनाइज्ड ट्रेड में 19% की ग्रोथ देखी गई है और ई-कॉमर्स सेल्स का 35% हिस्सा अब क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म से आ रहा है।
आगे की राह
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि कंपनी बढ़ती और अस्थिर कच्चे माल की कीमतों के बीच अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे मैनेज कर पाती है। मैनेजमेंट का कहना है कि भले ही मौजूदा कारोबारी माहौल चुनौतीपूर्ण है, लेकिन उम्मीद है कि लागत का दबाव कम होने पर प्रॉफिटेबिलिटी में सुधार होगा। निवेशक इस बात पर बारीकी से नजर रखेंगे कि कंपनी बढ़ती लागतों को ग्राहकों पर कितना असर डाले बिना बढ़ा पाती है और नए अधिग्रहणों को अपने बिजनेस मॉडल में कैसे एकीकृत करती है।
