Emami Limited ने पहली तिमाही (Q1 FY27) में **15%** की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है, जो **₹1,039 करोड़** रही। हालांकि, बढ़ी इनपुट कॉस्ट के चलते कंपनी का नेट प्रॉफिट **16%** घट गया है। मार्जिन बचाने के लिए कंपनी कीमतों में सोच-समझकर बढ़ोतरी कर रही है।
मार्जिन पर दबाव और लागत का खेल
Emami Limited ने 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में मिले-जुले नतीजे पेश किए हैं। कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 15% बढ़कर ₹1,039 करोड़ रहा, लेकिन कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट लगभग 16% गिरकर ₹137-139 करोड़ के बीच आ गया। रेवेन्यू में अच्छी ग्रोथ के बावजूद प्रॉफिट में गिरावट का मुख्य कारण कच्चे माल की बढ़ती कीमतें रहीं।
कंपनी के ग्रॉस मार्जिन में 360 बेसिस पॉइंट की गिरावट आई और यह 65.8% पर आ गया। मैनेजमेंट का कहना है कि क्रूड ऑयल और पैकेजिंग मटेरियल की बढ़ी कीमतों ने मार्जिन पर भारी दबाव डाला है।
कीमतों में बढ़ोतरी की रणनीति
इन लागतों से निपटने के लिए Emami ने अपनी कीमतों में सोच-समझकर बढ़ोतरी करने की रणनीति अपनाई है। कंपनी पहले ही 3-4% की बढ़ोतरी कर चुकी है और आने वाली दो तिमाहियों में 2-3% की और बढ़ोतरी की योजना है। मैनेजमेंट को उम्मीद है कि इन बढ़ोतरी के साथ-साथ कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन (लागत में कमी) के Efforts से मार्जिन को संभाला जा सकेगा। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि इन कीमतों के बढ़ने से कंज्यूमर डिमांड पर कितना असर पड़ता है।
डोमेस्टिक और इंटरनेशनल बिजनेस का हाल
जहां डोमेस्टिक बिजनेस में 20% की ग्रोथ देखी गई (स्ट्रैटेजिक इन्वेस्टमेंट शामिल) और 12% की ग्रोथ (लाइक-फॉर-लाइक बेसिस पर) रही, वहीं इंटरनेशनल बिजनेस 12% गिर गया। इसका मुख्य कारण वेस्ट एशिया क्षेत्र में जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल और अस्थिरता रही, जो कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण मार्केट है।
'न्यू-एज' पोर्टफोलियो की चमक
कंपनी के 'न्यू-एज' पोर्टफोलियो, जिसमें AloFrut, Vedix और SkinKraft जैसे ब्रांड्स शामिल हैं, ने शानदार प्रदर्शन किया है। इस सेगमेंट ने डोमेस्टिक रेवेन्यू में 18% का योगदान दिया और इसमें 61% की ईयर-ऑन-ईयर ग्रोथ (लाइक-टू-लाइक बेसिस पर) दर्ज की गई। Emami इन नए ब्रांड्स को भविष्य में ग्रोथ का बड़ा इंजन मान रही है और उम्मीद है कि इनका योगदान डोमेस्टिक रेवेन्यू में 25% तक पहुंच जाएगा।
निवेशकों के लिए मुख्य बातें
आगे चलकर निवेशकों की नजरें कई बातों पर रहेंगी। सबसे पहले, कीमतों में बढ़ोतरी का वॉल्यूम ग्रोथ पर क्या असर होता है। दूसरा, वेस्ट एशिया में जारी टेंशन के बीच कंपनी अपने इंटरनेशनल बिजनेस को कैसे मैनेज करती है। और तीसरा, कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता आने से मार्जिन रिकवरी का रास्ता कितना साफ होता है। अगर महंगाई जारी रही, तो आने वाली तिमाहियों में प्रॉफिट पर दबाव बना रह सकता है।
