त्योहारी सीजन में सुस्त बिक्री और महंगे कंपोनेंट्स की दोहरी मार से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियां परेशान हैं। कंपनियों ने अपनी प्रोडक्शन क्षमता को **20%** तक घटाने का फैसला किया है, जिसका सीधा असर अब निवेशकों के सेंटिमेंट पर पड़ रहा है।
त्योहारी सीजन के दौरान उम्मीद से कम बिक्री होने के कारण स्मार्टफोन और टेलीविजन बनाने वाली कंपनियां अब फूंक-फूंक कर कदम उठा रही हैं। पिछले एक साल के मुकाबले सेल्स वॉल्यूम में लगभग 25% की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे रिटेल काउंटर्स पर अनसोल्ड स्टॉक जमा हो गया है। इसे देखते हुए कंपनियां अब नई मैन्युफैक्चरिंग के बजाय मौजूदा इन्वेंट्री को क्लियर करने पर जोर दे रही हैं ताकि कैश फ्लो बना रहे।
महंगाई का डबल अटैक
इस उत्पादन कटौती की सबसे बड़ी वजह मेमोरी चिप्स की कीमतों में आया उछाल है। AI सेक्टर की डिमांड बढ़ने के कारण मेमोरी चिप्स महंगे हो गए हैं, जिसका सीधा असर कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स की जेब पर पड़ा है। कंपनियों ने अपनी लागत का बोझ ग्राहकों पर डालते हुए स्मार्टफोन की कीमतें 35% से 40% और टीवी की कीमतें 20% से 25% तक बढ़ा दी हैं। इस भारी बढ़ोतरी ने आम खरीदारों को बाजार से दूर कर दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
इलेक्ट्रॉनिक्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर के निवेशकों के लिए चिंता का विषय कंपनियों की बैलेंस शीट है। स्टॉक जमा होने से वर्किंग कैपिटल की जरूरत बढ़ती है, जिससे कंपनियों के उधार लेने की लागत बढ़ सकती है। अगर स्टॉक निकालने के लिए कंपनियों को डिस्काउंट देना पड़ा, तो आने वाली तिमाहियों में उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।
हालांकि, 65 इंच से बड़े प्रीमियम टेलीविजन की मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है, लेकिन छोटे साइज के टीवी और बजट स्मार्टफोन्स की बिक्री में आई गिरावट चिंताजनक है। आने वाले समय में पीसीबी (PCB) जैसे जरूरी कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें भी सेक्टर के लिए चुनौती बनी रहेंगी।
