सरकार ने क्रूड और रिफाइंड खाने के तेल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटा दी है। इस कदम का मकसद रिटेल कीमतों को कम करना और डिमांड बढ़ाना है, जिससे फेस्टिव सीजन से पहले सेक्टर की ग्रोथ **3% से 4%** तक पहुंचने की उम्मीद है।
ड्यूटी में कटौती का गणित
सरकार के इस फैसले से रॉ मटेरियल की लागत में कमी आएगी। अब क्रूड पाम और सोयाबीन ऑयल पर प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 16.5% से घटकर 11% रह गई है, जबकि क्रूड सनफ्लावर ऑयल की ड्यूटी को 16.5% से सीधा 5.5% कर दिया गया है। वहीं, रिफाइंड सोयाबीन और पाम ऑयल पर भी ड्यूटी को 35.75% से घटाकर 30.25% किया गया है।
क्यों है यह निवेशकों के लिए अहम?
पिछले कुछ समय से हाई महंगाई के चलते यह सेक्टर 1% से 1.5% की सुस्त ग्रोथ से जूझ रहा था। Emami Agrotech जैसे बड़े खिलाड़ियों का मानना है कि इससे सप्लाई चेन की दिक्कतें दूर होंगी और कंपनियों को रिटेल दाम बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। त्योहारी सीजन के दौरान वॉल्यूम ग्रोथ में सुधार की उम्मीद है।
पोर्टफोलियो में बदलाव की रणनीति
कंपनियां अब सिर्फ एडिबल ऑयल पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं। Emami Agrotech जैसी कंपनियां स्नैक्स, चॉकलेट स्प्रेड, आटा और मसालों जैसे एफएमसीजी (FMCG) सेगमेंट में तेजी से विस्तार कर रही हैं। यह रणनीति कमोडिटी की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से मुनाफे को बचाने के लिए बनाई गई है।
जोखिम और चुनौतियां
सब कुछ पॉजिटिव नहीं है। ग्लोबल सप्लाई चेन, बायोफ्यूल के नियम और वेदर पैटर्न का असर अभी भी बना हुआ है। रबी सीजन के लिए अक्टूबर की बारिश और नमी बेहद महत्वपूर्ण है। अगर मौसम ने साथ नहीं दिया, तो डोमेस्टिक ऑयलसीड सप्लाई पर असर पड़ सकता है। निवेशकों को नजर रखनी होगी कि कंपनियां कितनी जल्दी इस राहत का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाती हैं और वॉल्यूम में कितनी रिकवरी देखने को मिलती है।
