सरकार ने क्रूड पाम और सोयाबीन ऑयल पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाकर **5%** कर दी है, जबकि सनफ्लावर ऑयल पर इसे खत्म कर दिया गया है। इस फैसले से स्नैक और बेकरी कंपनियों की लागत कम होगी, लेकिन कंपनियां इसका लाभ दाम घटाने के बजाय अपने मार्जिन को सुधारने में लगाएंगी।
भारत सरकार द्वारा एडिबल ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में की गई कटौती स्नैक और बेकरी सेक्टर के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है। गुरुवार से लागू हुई नई पॉलिसी के तहत, अब क्रूड पाम और सोयाबीन ऑयल पर 5% ड्यूटी लगेगी, जबकि सनफ्लावर ऑयल पर ड्यूटी पूरी तरह से हटा दी गई है। खाने-पीने का सामान बनाने वाली कंपनियों के लिए तेल एक प्रमुख रॉ मटेरियल है, इसलिए इस फैसले का सीधा असर उनकी ऑपरेशनल लागत पर पड़ेगा।
मार्जिन रिकवरी को पहली प्राथमिकता
भले ही ड्यूटी कट से तेल सस्ता हो गया हो, लेकिन आम ग्राहकों को अभी स्नैक्स के पैकेट सस्ते होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। पिछले कुछ समय से महंगाई के कारण इन कंपनियों के मुनाफे पर काफी दबाव था। लिहाजा, कंपनियां इस बचत का फायदा ग्राहकों को देने के बजाय अपने गिरते हुए प्रॉफिट मार्जिन को ठीक करने में लगा रही हैं।
स्नैक मेकर्स पर कैसा होगा असर?
Bikaji Foods International जैसी कंपनियों ने संकेत दिया है कि आने वाले हफ्तों में उनकी तेल खरीद की लागत में 3% से 4% तक की कमी आ सकती है। जिन कंपनियों का काम बड़े पैमाने पर पाम ऑयल के इस्तेमाल (जैसे फ्राइंग प्रोसेस) पर निर्भर है, उन्हें काफी फायदा होगा। हालांकि, यह राहत हर किसी के लिए नहीं है—जो कंपनियां ग्राउंडनट ऑयल जैसे घरेलू उत्पाद इस्तेमाल करती हैं या पर्सनल केयर/सोप सेक्टर में हैं, उन पर इसका असर सीमित रहेगा।
जोखिम और निगरानी जरूरी
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ड्यूटी कट का असली फायदा ग्लोबल कमोडिटी कीमतों पर भी निर्भर करेगा। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो ड्यूटी में मिली राहत का असर खत्म हो सकता है। साथ ही, कंपनियों के पास पहले से महंगा स्टॉक मौजूद है, जिसे खत्म होने में समय लगेगा। निवेशकों को अगली तिमाही के नतीजों में EBITDA मार्जिन पर नजर रखनी चाहिए कि कैसे ये बचत कंपनी के मुनाफे में बदलती है।
