फेस्टिव सीजन के दौरान ई-कॉमर्स पर शॉपिंग का ट्रेंड बदला है। क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन की संख्या में **8%** की बढ़त हुई है, लेकिन कुल वैल्यू **₹37,385 करोड़** तक गिर गई है, जो सतर्क होते कंज्यूमर के व्यवहार को दर्शाती है।
भारत में इस बार फेस्टिव सेल के दौरान कंज्यूमर के शॉपिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर, 2026 के बीच क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन की संख्या 8% बढ़कर 491 लाख पर पहुंच गई, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में 8% की गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा ₹37,385 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹40,652 करोड़ था।
महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स और कम डिस्काउंट का असर
कुल वैल्यू में कमी का मुख्य कारण महंगे आइटम्स (Big-ticket items) की मांग में आई सुस्ती है। ₹15,000 से ₹30,000 की रेंज वाले स्मार्टफोन्स की कीमतों में लगभग 50% की बढ़ोतरी हुई है, जिससे खरीदार या तो खरीदारी टाल रहे हैं या सस्ते विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं। मैन्युफैक्चरर्स के लिए बढ़ती कंपोनेंट लागत और जीएसटी (GST) में इस बार किसी राहत के न होने के कारण गहरे डिस्काउंट देना मुश्किल हो गया है।
क्विक कॉमर्स और ऑफलाइन रिटेल का दबदबा
बाजार में अब स्ट्रक्चरल बदलाव दिख रहे हैं। क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के उदय से अब डिमांड एक ही हफ्ते में केंद्रित न रहकर पूरे महीने में बंट रही है। वहीं, ऑफलाइन रिटेल में भी 6% की ग्रोथ देखी गई है, जो यह संकेत देती है कि ग्राहक अब ऑनलाइन के बजाय दुकानों पर जाकर सामान देखना और परखना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए यह एक अहम संकेत है कि बड़ी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ पर दबाव बढ़ सकता है। आने वाले समय में मैनेजमेंट कमेंट्री, इन्वेंटरी लेवल और मार्जिन प्रेशर जैसे फैक्टर्स पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि बाजार का पुराना ग्रोथ मॉडल अब तेजी से बदल रहा है।
