Dry Fruit Prices: दीवाली पर महंगा हुआ ड्राई फ्रूट्स का स्वाद, कीमतें **40%** तक बढ़ीं

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Dry Fruit Prices: दीवाली पर महंगा हुआ ड्राई फ्रूट्स का स्वाद, कीमतें **40%** तक बढ़ीं

दीवाली के इस सीजन में ड्राई फ्रूट्स की बढ़ती कीमतों ने गिफ्ट हैंपर्स का गणित बिगाड़ दिया है। दाम **25%** से **40%** तक उछलने के कारण रिटेलर्स महंगे पिस्ता की जगह अब सस्ते बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, हालांकि प्रीमियम सेगमेंट में अभी भी **5% से 7%** की वॉल्यूम ग्रोथ दिख रही है।

भारत के फेस्टिव गिफ्टिंग मार्केट में इस बार दीवाली पर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रॉ मटेरियल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी के चलते रिटेलर्स और मैन्युफैक्चरर्स को अपने गिफ्ट हैंपर्स का पूरा स्ट्रक्चर बदलना पड़ा है ताकि वे आम ग्राहकों के बजट में बने रहें।

ग्लोबल सप्लाई चेन बनी मुसीबत

इस महंगाई की मुख्य वजह केवल घरेलू मांग नहीं, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में आई रुकावटें हैं। कैलिफोर्निया में पिस्ता की फसल अपनी सामान्य पैदावार के केवल 40% स्तर तक ही पहुंच पाई है। इसके अलावा, पश्चिम एशिया में लॉजिस्टिक दिक्कतों के कारण फ्रेट कॉस्ट काफी बढ़ गई है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से इंपोर्ट करना और भी महंगा हो गया है।

आंकड़ों के अनुसार, बादाम के भाव 20% से 35% तक बढ़े हैं, जबकि पिस्ता की कीमतें तो लगभग दोगुनी हो गई हैं, जिससे बजट-फ्रेंडली पैक में उन्हें शामिल करना अब मुश्किल हो गया है।

मार्जिन बचाने के लिए कंपनियों का 'जुगाड़'

कंपनियां अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए अब डिफेंडिंग स्ट्रेटेजी अपना रही हैं। मैन्युफैक्चरर्स महंगे नट्स की जगह सूरजमुखी के बीज (sunflower seeds), कद्दू के बीज (pumpkin seeds) और ड्राई बेरीज का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई मामलों में, ग्राहकों को कीमतों का झटका न लगे, इसके लिए गिफ्ट बॉक्स का वजन (net weight) भी घटाया जा रहा है।

इन्वेस्टर्स के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस इनपुट कॉस्ट के दबाव को कैसे झेलती हैं। यदि कंपनियां पूरी महंगाई ग्राहकों पर नहीं डाल पाती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव दिख सकता है।

प्रीमियम सेगमेंट में अब भी दम

जहां मास-मार्केट गिफ्टिंग में बदलाव दिख रहा है, वहीं प्रीमियम सेगमेंट की कहानी अलग है। मैकाडामिया, पेकन और फ्लेवर्ड काजू जैसी प्रीमियम चीजों की मांग अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। बाजार में यह साफ विभाजन दिख रहा है—जहां एक तरफ आम ग्राहक बजट-फ्रेंडली पैक चुन रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लग्जरी सेगमेंट की मांग ने पूरे सेक्टर में 5-7% की वॉल्यूम ग्रोथ बनाए रखी है। आने वाले समय में कंपनियों के क्वार्टरली रिजल्ट्स ही यह तय करेंगे कि क्या वे बिना मार्जिन को नुकसान पहुंचाए इस ग्रोथ को बरकरार रख पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.