Dollar Industries और Rupa & Company का बड़ा फैसला: सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट पर खर्च घटाया, डिजिटल पर फोकस बढ़ाया

CONSUMER-PRODUCTS
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Dollar Industries और Rupa & Company का बड़ा फैसला: सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट पर खर्च घटाया, डिजिटल पर फोकस बढ़ाया

होजरी (Hosiery) की जानी-मानी कंपनियां Dollar Industries और Rupa & Company अपने कुल विज्ञापन खर्च का **10%** से कम हिस्सा अब सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट पर खर्च कर रही हैं। दोनों कंपनियां मांग में अस्थिरता के बीच ग्रोथ बनाए रखने के लिए डिजिटल चैनलों और रीजनल मार्केटिंग की ओर पैसा लगा रही हैं।

सेलेब्रिटी पर खर्च में कटौती, डिजिटल पर दांव

भारत की प्रमुख इनरवेअर (Innerwear) कंपनियां Dollar Industries और Rupa & Company अपनी मार्केटिंग रणनीतियों में बड़ा बदलाव कर रही हैं। ये कंपनियां महंगे सेलेब्रिटी एंडोर्समेंट पर अपनी निर्भरता कम कर रही हैं। हालांकि ये ब्रांड्स अभी भी पॉपुलर फिल्म स्टार्स के साथ काम कर रहे हैं, लेकिन अब सेलेब्रिटी फीस उनके कुल विज्ञापन बजट का 10-12% से भी कम है। इसके बजाय, दोनों कंपनियां मुश्किल कंजम्पशन माहौल से निकलने के लिए डिजिटल मीडिया, प्राइम-टाइम टेलीविजन और टियर-2 व टियर-3 बाजारों में स्थानीय विज्ञापनों पर फंड को फिर से आवंटित कर रही हैं।

क्यों हो रहा ये बदलाव?

यह स्ट्रेटेजिक बदलाव ऐसे समय में आया है जब कंपनियां अत्यधिक प्रतिस्पर्धी इनरवेअर बाजार में अपनी पहचान बनाए रखते हुए लागत को मैनेज करने के दबाव का सामना कर रही हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया कैंपेन और आउटडोर होर्डिंग्स जैसे रीजनल विज्ञापनों को प्राथमिकता देकर, कंपनियां ग्राहकों तक सीधे पहुंचने का लक्ष्य बना रही हैं। इस बदलाव का मकसद मार्केटिंग की एफिशिएंसी को बढ़ाना है, जिससे कंपनियां केवल सेलेब्रिटी ब्रांडिंग की मास अपील पर निर्भर रहने के बजाय रीजनल मांग के रुझानों पर अधिक तेजी से प्रतिक्रिया दे सकें।

नतीजों पर कैसा असर?

फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही के वित्तीय प्रदर्शन से पता चलता है कि ऑपरेशनल और मार्केटिंग एफिशिएंसी पर इस फोकस का बॉटम लाइन पर मिला-जुला असर दिख रहा है। Dollar Industries ने स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट में साल-दर-साल 25% की बढ़ोतरी दर्ज की, जो ₹24.5 करोड़ रहा। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 11.80% तक पहुंच गया। वहीं, Rupa & Company ने भी पिछले साल की समान तिमाही की तुलना में मुनाफे में 55% की मजबूत उछाल दर्ज की। हालांकि, कंपनी ने बताया कि ऊंचे प्रमोशनल खर्च और कच्चे माल की बढ़ती लागत के कारण मार्जिन पर अस्थायी प्रभाव पड़ा है।

सेक्टर के लिए आगे क्या है?

मुनाफे में इनগুলোর के बावजूद, सेक्टर कई स्ट्रक्चरल चुनौतियों का सामना कर रहा है जिन पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए। कच्चे माल, विशेष रूप से यार्न और कॉटन की कीमतों में अस्थिरता, एक निरंतर जोखिम बना हुआ है। अगर कंपनियां लागत को उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा पाती हैं, तो यह ग्रॉस मार्जिन को कम कर सकता है। इसके अलावा, इनरवेअर सेक्टर संगठित और असंगठित दोनों खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है, जो ब्रांड्स की कीमतों में आक्रामक वृद्धि की क्षमता को सीमित करता है।

आगे चलकर, इस मार्केटिंग बदलाव की प्रभावशीलता को उपभोक्ता मांग, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में परखा जाएगा। डिजिटल और रीजनल एंगेजमेंट की ओर बढ़ने से फिक्स्ड सेलेब्रिटी लागत कम करने में मदद मिलती है, लेकिन कंपनियों को बाजार हिस्सेदारी हासिल करने के लिए आक्रामक डिस्काउंट और प्रमोशनल एक्टिविटी से होने वाले मार्जिन संपीड़न के जोखिम को मैनेज करना होगा। शेयरधारकों के लिए प्रमुख निगरानी योग्य बातों में वॉल्यूम ग्रोथ ट्रेंड्स, कच्चे माल की कीमतों में स्थिरता और यह देखना शामिल है कि फेस्टिव सीजन वर्तमान प्रतिस्पर्धी दबावों की भरपाई के लिए पर्याप्त खपत को बढ़ावा देता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.