Dodla Dairy के लिए दूसरी तिमाही चुनौतीपूर्ण रही है। दूध की खरीद लागत बढ़ने के कारण कंपनी का नेट प्रॉफिट **44.3%** गिरकर **₹36.59 करोड़** पर आ गया है, हालांकि कंपनी के रेवेन्यू में **17.4%** की बढ़त देखी गई है।
मार्जिन पर दबाव की वजह
कंपनी के मुनाफे में यह भारी गिरावट मुख्य रूप से दूध की खरीद लागत बढ़ने के कारण आई है। Dodla Dairy को दूध खरीदने के लिए 15.7% अधिक खर्च करना पड़ा, जिससे लागत ₹43.2 प्रति लीटर तक पहुंच गई। इसकी तुलना में कंपनी अपनी बिक्री कीमतों (Realization Price) को केवल 8% बढ़ाकर ₹61.9 प्रति लीटर ही कर पाई। इसके अलावा, पैकिंग सामग्री की लागत में 41.6% का उछाल और लेबर खर्च बढ़ने से भी कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा है।
मैनेजमेंट ने बताया कि तिमाही के अंत में दूध की कीमतों में ₹2.5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी, जिसका फायदा सीमित रहा। साथ ही, त्योहारी सीजन का समय बदलने के कारण भी मांग के पैटर्न में बदलाव देखा गया।
नई रणनीति और विस्तार
मुश्किलों के बीच कंपनी ने अपने बिजनेस को डायवर्सिफाई करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने Meadow India Holdings Ltd के साथ एक जॉइंट वेंचर को मंजूरी दी है, जिसमें Dodla Dairy की 40% हिस्सेदारी होगी। यह साझेदारी संस्थागत ग्राहकों (Institutional Clients) को डेयरी सामग्री बेचने पर केंद्रित होगी।
राहत की खबरें
कुछ क्षेत्रों में कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है:
- दही (Curd): बिक्री वॉल्यूम में 23% का इजाफा दर्ज किया गया।
- इंटरनेशनल बिजनेस: केन्या और युगांडा के कारोबार से आने वाले रेवेन्यू में 55.9% की शानदार बढ़ोतरी हुई है, जिसने घरेलू बाजार के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद की है।
अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आने वाली तिमाहियों में कंपनी अपनी लागत को कैसे मैनेज करती है और नया जॉइंट वेंचर रेवेन्यू में कितना योगदान दे पाता है।
