Dixon Technologies के सितंबर तिमाही के नतीजे निवेशकों के लिए चिंता का सबब बन गए हैं। जहां कंपनी का रेवेन्यू **42%** बढ़ा है, वहीं नेट प्रॉफिट में **45%** की भारी गिरावट दर्ज की गई है। साथ ही, सरकार से मिलने वाली **₹1,110 करोड़** की PLI इंसेंटिव राशि अब भी अटकी हुई है, जिस पर ऑडिटर्स ने भी सवाल उठाए हैं।
PLI इंसेंटिव का फंसा पेंच
कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती सरकार से मिलने वाली ₹1,110.06 करोड़ की PLI (Production-Linked Incentive) राशि है। कंपनी ने इसे पिछले फाइनेंशियल ईयर में इनकम के तौर पर दिखाया था, लेकिन अभी तक भुगतान फाइनल नहीं हुआ है। इस बीच, कंपनी ने ₹576.95 करोड़ की एक लायबिलिटी (Liability) भी अलग रखी है, जो उसे एक कस्टमर को चुकानी पड़ सकती है। हालांकि मैनेजमेंट का कहना है कि वे इस राशि को वसूलने के लिए कानूनी सलाह ले रहे हैं, लेकिन ऑडिटर्स ने इस मुद्दे को लेकर निवेशकों को आगाह किया है।
खराब प्रदर्शन के पीछे की कहानी
सितंबर तिमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू तो ₹21,863 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 42% अधिक है, लेकिन मार्जिन के मोर्चे पर कंपनी को बड़ी मार पड़ी है। EBITDA में 37% की गिरावट आई है और यह ₹666 करोड़ पर आ गया है।
हाफ-ईयरली (H1 FY27) आंकड़ों पर नजर डालें तो रेवेन्यू में 35% और नेट प्रॉफिट में 10% की ग्रोथ देखी गई है, जो तिमाही नतीजों के दबाव के बीच थोड़ी राहत देती है।
बोर्ड में बड़ा बदलाव
कंपनी ने लीडरशिप में बदलाव करते हुए पृथ्वी वछानी (Prithvi Vachani) को 5 साल के लिए एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया है। वे एग्जीक्यूटिव चेयरमैन सुनील वछानी के बेटे हैं और पहले भी Asus, HP, Jio और Xiaomi जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ पार्टनरशिप संभालने का अनुभव रखते हैं। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनी कैसे अपने प्रॉफिट मार्जिन को स्टेबल करती है और अटके हुए सरकारी इंसेंटिव का समाधान कब निकलता है।
