Diageo India ने अपने सबसे लोकप्रिय ब्रांड McDowell’s No. 1 को नए रूप और बेहतर रेसिपी के साथ पेश किया है। कंपनी की कोशिश बदलते बाजार में प्रीमियम ग्राहकों को आकर्षित करने की है। अब देखना यह है कि क्या यह रणनीति वॉल्यूम पर असर डाले बिना मार्जिन को बढ़ा पाएगी।
United Spirits, जिसे हम मुख्य रूप से Diageo India के नाम से जानते हैं, ने अपनी सबसे बिकने वाली व्हिस्की McDowell’s No. 1 की ब्रांडिंग और क्वालिटी में बड़ा बदलाव किया है। कंपनी ने इसके ब्लेंड में स्कॉच, इंडियन माल्ट और प्रीमियम ग्रेन स्पिरिट्स का मिश्रण शामिल किया है। साथ ही, इसे नया और मॉडर्न लुक देने के लिए पैकेजिंग को भी पूरी तरह बदल दिया गया है। गौरतलब है कि यह ब्रांड हर साल 3 करोड़ से ज्यादा केस बेचता है, जो कंपनी के कुल रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा है।
ग्राहकों की बदलती पसंद
यह फैसला 11 अलग-अलग बाजारों में 10,000 ग्राहकों के फीडबैक के बाद लिया गया है। कंपनी इसे अब केवल एक 'किफायती' ड्रिंक के टैग से बाहर निकालकर एक प्रीमियम विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहती है। यह कदम भारतीय शराब बाजार के उस बदलते ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाता है, जहां उपभोक्ता कम कीमत के बजाय बेहतर क्वालिटी और ब्रांड को तरजीह दे रहे हैं।
निवेशकों के लिए चुनौतियां और मौके
निवेशकों के लिए यह एक 'बैलेंसिंग एक्ट' जैसा है। क्वालिटी अपग्रेड होने से मार्जिन तो बेहतर हो सकता है, लेकिन अगर दाम ज्यादा बढ़े, तो कंपनी अपने उन ग्राहकों को खो सकती है जो कीमत को लेकर बहुत जागरूक हैं।
इसके अलावा, भारतीय शराब उद्योग में टैक्स का ढांचा और सख्त नियम एक बड़ी चुनौती हैं। रॉ मटेरियल जैसे ग्रेन और ग्लास की बढ़ती कीमतों का सीधा असर कंपनी के प्रॉफिट पर पड़ता है। ऐसे में मैनेजमेंट के सामने एक तरफ ब्रांड वैल्यू बढ़ाने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ लागत को कंट्रोल में रखने की। आने वाले क्वार्टरली रिजल्ट्स में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या McDowell’s No. 1 का सेल्स वॉल्यूम इस बदलाव के बाद भी बरकरार रहता है या नहीं।
