Diageo India: युवाओं की सोच बदली, प्रीमियम की ओर बढ़ा रुझान, कंपनी का बड़ा दांव!

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AuthorNeha Patil|Published at:
Diageo India: युवाओं की सोच बदली, प्रीमियम की ओर बढ़ा रुझान, कंपनी का बड़ा दांव!
Overview

Diageo India के मैनेजिंग डायरेक्टर प्रवीण सोमेश्वर का कहना है कि भारत के युवा अब वॉल्यूम वाले ड्रिंक्स की बजाय प्रीमियम स्पिरिट्स और कॉकटेल को ज्यादा तरजीह दे रहे हैं। कंपनी इसी 'ड्रिंक बेटर' (Drink Better) ट्रेंड को भुनाने के लिए अपनी 'थ्री इंडियंस' (Three Indias) स्ट्रैटेजी पर फोकस कर रही है, जो एंट्री-लेवल से लेकर लग्जरी कंज्यूमर तक को टारगेट करती है।

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'ड्रिंक बेटर' का बढ़ता चलन

Diageo India के मैनेजिंग डायरेक्टर, प्रवीण सोमेश्वर, का कहना है कि भारत में युवा पीढ़ी कम पीने के बजाय 'बेहतर पी रही' है। इसका मतलब है कि वे अब हाई-वॉल्यूम वाले ड्रिंक्स से हटकर प्रीमियम स्पिरिट्स और कॉकटेल पर ज्यादा खर्च कर रहे हैं। यह बदलाव महिलाओं के बीच बढ़ती खपत में भी दिख रहा है, जो सालाना करीब 11% की दर से बढ़ रही है, और शहरी इलाकों में 'ड्रिंकिंग बेटर' का चलन जोर पकड़ रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए, Diageo India ने अपनी 'थ्री इंडियंस' स्ट्रैटेजी को मजबूत किया है। यह रणनीति बाजार को तीन हिस्सों में बांटती है: एंट्री-लेवल कंज्यूमर्स, एस्पिरेशनल मिडिल-क्लास और लग्जरी कंज्यूमर्स। कंपनी को लग्जरी सेगमेंट में सबसे तेज ग्रोथ की उम्मीद है, जहां हाई-वैल्यू वाले ब्रांड्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। इस स्ट्रेटेजी से Diageo अपने प्रोडक्ट्स और प्राइसिंग को हर कंज्यूमर ग्रुप के हिसाब से तैयार कर पाती है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में, Diageo India का रेवेन्यू ₹27,276 करोड़ रहा, जो Pernod Ricard India के ₹27,445.80 करोड़ के रेवेन्यू से थोड़ा ही कम है। इससे पता चलता है कि भारत के करीब $39.3 बिलियन के अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट में कितनी कड़ी प्रतिस्पर्धा है।

डेटा-आधारित तरीके और इनोवेशन (Data-Driven Tactics & Innovation)

बदलते बाजार को समझने के लिए, Diageo India बारीकी से डेटा एनालिसिस का सहारा ले रही है। अब कंपनी हर रिटेल स्टोर के प्रदर्शन का भी विश्लेषण करती है, जो कि सोमेश्वर के आने से पहले संभव नहीं था। बार जैसे 'ऑन-प्रीमिस' (on-premise) वेन्यू को इंडस्ट्री से जुड़ने के लिए महत्वपूर्ण 'स्क्रीन' माना जा रहा है। Diageo के एक्सपेरिमेंटल प्रोग्राम, जिनमें बारटेंडरों को कंपनी के व्हिस्की ब्रांड्स से कॉकटेल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, नए कंज्यूमर्स को आकर्षित करने में सफल रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, जो नए तरीकों से इस कैटेगरी से जुड़ रही हैं।

एक और अहम ग्रोथ ड्राइवर है छोटे पैक साइज का इस्तेमाल, जो 180ml से लेकर 350ml तक के हैं। ये मिनी पैक प्रीमियम ब्रांड्स को कम कीमत पर उपलब्ध कराकर 'एस्पिरेशन' (aspiration) जगाते हैं और कंज्यूमर्स को प्रोडक्ट ट्राई करने के लिए प्रेरित करते हैं। Diageo को उम्मीद है कि भविष्य में इन छोटे फॉर्मेट्स से प्रीमियम ब्रांड्स की 30-40% तक बिक्री हो सकती है, जो कई ग्लोबल मार्केट्स से कहीं ज्यादा है। इतना ही नहीं, 40% ग्रोथ नए प्रोडक्ट्स से आ रही है, जिनमें फ्लेवर एक्सटेंशन, रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) कॉकटेल और नए पैकेजिंग डिजाइन शामिल हैं।

चुनौतियां और रेगुलेटरी अड़चनें (The Bear Case & Regulatory Headwinds)

प्रीमियमाइजेशन के इस बढ़ते ट्रेंड के बावजूद, Diageo India के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। Pernod Ricard India जैसी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा लगातार स्ट्रेटेजिक बदलाव की मांग करती है। वहीं, Diageo India की पैरेंट कंपनी, Diageo plc, ने फाइनेंशियल ईयर 2024 में 1.4% की गिरावट के साथ $20.27 बिलियन का कुल ग्रुप रेवेन्यू दर्ज किया, जिसका एक कारण लैटिन अमेरिका और कैरिबियन (LAC) ऑपरेशंस में आई दिक्कतें थीं। 25 फरवरी 2026 को 6% की शेयर प्राइस गिरावट, लोअर गाइडेंस और डिविडेंड कट (Dividend Cut) भी कंपनी की ग्लोबल स्ट्रैटेजी पर असर डाल सकते हैं।

भारत का रेगुलेटरी माहौल भी काफी जटिल है। अल्कोहल से जुड़े नियम हर राज्य में अलग-अलग होते हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और रिटेल में अनिश्चितता बनी रहती है। जुलाई 2026 से लागू होने वाले नए नियम, जैसे कि मैंडेटरी लेबलिंग और कैटेगरी की विस्तृत परिभाषा, कंज्यूमर के लिए ज्यादा पारदर्शिता लाएंगे, लेकिन कंपनियों को भी इसके हिसाब से ढलना होगा। हालांकि, बढ़ती आय और मिडिल क्लास की वजह से डिस्पोजेबल खर्च बढ़ रहा है, लेकिन लगभग एक अरब भारतीयों के पास अभी भी गैर-जरूरी चीजों पर खर्च करने के लिए पर्याप्त आय नहीं है। ऐसे में, 'थ्री इंडियंस' जैसी कॉम्प्लेक्स स्ट्रेटेजी को मार्केट में सफलतापूर्वक लागू करना जोखिम भरा हो सकता है।

आउटलुक और एनालिस्ट्स की राय

भारत का अल्कोहलिक बेवरेज मार्केट तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। प्रीमियमाइजेशन और डोमेस्टिक सिंगल माल्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण 2032 तक स्पिरिट्स की वॉल्यूम CAGR लगभग 2.23% रहने का अनुमान है। एनालिस्ट्स भारत को Diageo के लिए एक 'की ग्रोथ मार्केट' (key growth market) मानते हैं, और 'ड्रिंक बेटर' ट्रेंड वैल्यू कैप्चर करने का बड़ा मौका दे रहा है। Diageo plc का लक्ष्य भारत में अपने प्रीमियम और उससे ऊपर (P&A) सेगमेंट में डबल-डिजिट ग्रोथ हासिल करना है, साथ ही मार्जिन बढ़ाना है। कंपनी 2030 तक अपने टॉपलाइन को दोगुना करने की योजना बना रही है, जो अनुकूल मैक्रोइकॉनॉमिक कंडीशन और पॉलिसी स्थिरता पर निर्भर करेगा। यह प्रीमियमाइजेशन पर फोकस, उन ब्रॉडर मार्केट ट्रेंड्स के अनुरूप है जहां कंज्यूमर्स एक्सपीरियंस (experiential) वाले प्रोडक्ट्स और डोमेस्टिक क्राफ्ट स्पिरिट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। कुछ एनालिस्ट्स के अनुसार, Diageo के ग्लोबल स्टॉक के लिए शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म आउटलुक सतर्क है, लेकिन भारत में कंपनी की स्ट्रेटेजिक पहल वहां के बदलते कंज्यूमर बेस और एस्पिरेशनल परचेजिंग पावर का फायदा उठाने के लिए डिजाइन की गई है।

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