फाइनेंशियल ईयर 2026 में दिल्ली के सरकारी आउटलेट्स पर शराब की मांग जबरदस्त रही। कुल **9.61 करोड़** बोतलों की बिक्री के साथ भारतीय शराब (IMFL) ने मार्केट पर अपना दबदबा बनाए रखा है।
दिल्ली के सरकारी लिकर रिटेल स्टोर्स ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में कुल 9.61 करोड़ बोतलों की बिक्री दर्ज की है। डेटा के मुताबिक, इसमें इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) का पलड़ा सबसे भारी रहा, जिसकी 4.47 करोड़ यूनिट्स बिकीं। वहीं, इम्पोर्टेड फॉरेन लिकर (IFL) की बिक्री महज 23.3 लाख बोतल तक ही सीमित रही। यह ट्रेंड साफ बताता है कि भारतीय अल्कोहल इंडस्ट्री में वॉल्यूम का असली ड्राइवर मास-मार्केट घरेलू स्पिरिट्स ही हैं।
सीजन और डिमांड का कनेक्शन
दिल्ली में शराब की बिक्री पर त्योहारों का असर साफ दिखा। दिवाली और होली के चलते नवंबर और मार्च में वॉल्यूम में तगड़ा उछाल आया, जबकि जुलाई के गर्म महीनों में बीयर की बिक्री पीक पर रही। United Spirits, United Breweries और Radico Khaitan जैसी कंपनियों के लिए सप्लाई चेन और रेवेन्यू प्लानिंग में ये सीजनल आंकड़े बेहद अहम भूमिका निभाते हैं।
सरकारी कंट्रोल और रेगुलेटरी रिस्क
दिल्ली का लिकर मार्केट सरकारी रिटेल आउटलेट्स पर निर्भर है, जो इसे बाकी राज्यों से अलग बनाता है। एक्साइज पॉलिसी में बदलाव के बाद से अब पूरा डिस्ट्रीब्यूशन सरकारी ढांचे के तहत आता है, जिससे कंपनियों की सेल्स वेलोसिटी सीधे सरकार की एफिशिएंसी पर निर्भर हो गई है। निवेशकों के लिए यहाँ सबसे बड़ा रिस्क 'रेगुलेटरी अनिश्चितता' है। दिल्ली का मार्केट पहले भी पॉलिसी बदलावों के कारण अस्थिरता देख चुका है, इसलिए किसी भी नए सरकारी फैसले का सीधा असर इन कंपनियों की एक्सेस पर पड़ सकता है।
आगे चलकर मार्केट यह देखेगा कि कंपनियां कच्चे माल की लागत और मार्जिन के बीच कैसे बैलेंस बनाती हैं। हालांकि, फेस्टिव सीजन और गर्मियों में मांग का पैटर्न स्थिर है, लेकिन भविष्य में ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां राज्य की डिस्ट्रीब्यूशन पॉलिसी के साथ तालमेल बिठाकर प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर कैसे बढ़ती हैं।
