Delhi High Court ने एक सिंगल-जज बेंच से स्पष्टीकरण मांगा है कि PepsiCo को 'एनर्जी ड्रिंक' बनाने से क्यों रोका गया, जबकि मौजूदा स्टॉक बेचने की इजाजत दी गई है। यह मामला अब रेगुलेटरी अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
कोर्ट ने क्या कहा?
Delhi High Court की डिवीजन बेंच ने, जिसकी अध्यक्षता Acting Chief Justice Nitin Wasudeo Sambre कर रहे थे, सिंगल-जज बेंच से कानूनी तर्क स्पष्ट करने को कहा है। अदालत का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग पर रोक के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं दिए गए। सिंगल-जज बेंच को अब 1 हफ्ते के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
विवाद की जड़: FSSAI के नियम
यह पूरा विवाद Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) के उस निर्देश से शुरू हुआ है, जिसमें 'एनर्जी ड्रिंक' शब्द को पैकेजिंग से हटाने को कहा गया है। रेगुलेटर का कहना है कि भारतीय कानूनों के तहत 'एनर्जी ड्रिंक' कोई अधिकृत कैटेगरी नहीं है, जिसे लेकर कंपनियों को 'मिस-ब्रांडिंग' के नोटिस भेजे जा रहे हैं।
कंपनियों पर असर
यह चुनौती केवल PepsiCo तक सीमित नहीं है। Monster Energy, Reliance Consumer Products, और Red Bull जैसी बड़ी कंपनियां भी इस दबाव का सामना कर रही हैं। भारत में एनर्जी ड्रिंक का मार्केट हर साल 12.6% की रफ्तार से बढ़ रहा है। यदि मैन्युफैक्चरिंग पर लंबे समय तक रोक रहती है, तो कंपनियों की रेवेन्यू और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई 5 नवंबर, 2026 को तय की गई है। निवेशकों के लिए चिंता का विषय यह है कि अगर लेबलिंग बदली जाती है, तो ब्रांडिंग और मार्केटिंग स्ट्रैटेजी पर भारी खर्च करना पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि क्या सरकार और कोर्ट मिलकर इस पूरे सेक्टर के लिए कोई एक समान पॉलिसी लेकर आएंगे।
