त्योहारी सीजन से पहले दिल्ली के हेल्थ डिपार्टमेंट ने बड़े ऑनलाइन ग्रोसरी और डिलीवरी वेयरहाउस पर छापेमारी की है। इस जांच में एक्सपायरी सामान, कीट-पतंगों का बसेरा और घटिया क्वालिटी के उत्पाद मिले हैं, जिससे ई-ग्रोसरी सेक्टर के लिए रेगुलेटरी रिस्क बढ़ गया है।
छापेमारी में क्या मिला?
दिल्ली के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने ऑनलाइन फूड और ग्रोसरी वेयरहाउस पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। फेस्टिव सीजन के दौरान की गई इन छापेमारी में गंभीर हाइजीन उल्लंघन सामने आए हैं। अधिकारियों को वेयरहाउस में कीट-पतंगों (pests) का बसेरा, तापमान के गलत मैनेजमेंट और एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स मिले हैं।
खराब क्वालिटी की मार
जांच का दायरा काफी बड़ा था, जिसमें उत्तम नगर, वजीरपुर और दरियागंज जैसे इलाकों के हब्स को कवर किया गया। यहां से लिए गए 59 घी के सैंपल में से 19 सैंपल्स लैब टेस्ट में फेल हो गए हैं। यह डेटा सप्लाई चेन में क्वालिटी चेक की खामियों को उजागर करता है, क्योंकि कंपनियां तेजी से अपना इन्वेंट्री स्केल करने में लगी हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जोखिम?
इन्वेस्टर्स और मार्केट जानकारों के लिए यह एक बड़ा ऑपरेशनल रिस्क है। इन कंपनियों की वैल्यूएशन उनकी 'मिनटों में डिलीवरी' वाली क्षमता पर टिकी है, लेकिन त्योहारी सीजन के भारी ऑर्डर के दबाव में वेयरहाउस मैनेजमेंट और क्वालिटी कंट्रोल को नजरअंदाज करना अब इनके लिए रेगुलेटरी और रेप्युटेशनल रिस्क बन गया है।
आगे क्या होगा?
दिल्ली सरकार ने संबंधित फर्मों को सुधार नोटिस जारी किए हैं और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। कंपनियों के लिए अब चुनौती यह है कि वे डिलीवरी स्पीड बरकरार रखते हुए कंप्लायंस स्टैंडर्ड्स को कैसे सुधारती हैं। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां अपनी ऑडिट प्रोसेस को कितना सख्त करती हैं, क्योंकि कोई भी बड़ी चूक न केवल भारी जुर्माना लगा सकती है, बल्कि कस्टमर का भरोसा भी तोड़ सकती है।
