दिल्ली एक्साइज डिपार्टमेंट प्रीमियम Scotch whisky की कीमतों में **10-15%** की कटौती पर विचार कर रहा है। यह फैसला भारत-यूके ट्रेड एग्रीमेंट के तहत इम्पोर्ट ड्यूटी को **150%** से घटाकर **75%** किए जाने के बाद लिया जा रहा है, हालांकि नई एक्साइज पॉलिसी के कारण कीमतों में बदलाव अभी भी अनिश्चित बना हुआ है।
भारत और यूके के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के बाद से ही प्रीमियम शराब के शौकीनों की नजरें कीमतों पर टिकी हैं। 15 जुलाई, 2026 से ब्रिटिश शराब पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 150% से घटाकर 75% कर दिया गया है। हालांकि, फेडरल लेवल पर मिली इस राहत का असर दिल्ली की रिटेल दुकानों पर अब तक साफ तौर पर नहीं दिखा है।
राहत की उम्मीद और पेच
दिल्ली सरकार 10 अक्टूबर, 2026 के बाद चुनिंदा प्रीमियम स्कॉच ब्रांड्स के दामों में 10-15% तक की कटौती करने की तैयारी कर रही है। महाराष्ट्र, राजस्थान, गोवा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पहले ही अपनी पॉलिसी में बदलाव कर कीमतों को कम कर दिया है, लेकिन दिल्ली में अभी भी प्रशासनिक और नीतिगत उलझनें बरकरार हैं।
क्या है निवेश और कंज्यूमर के लिए रिस्क?
निवेशकों और ग्राहकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कम कस्टम ड्यूटी का मतलब हमेशा सस्ता प्रोडक्ट नहीं होता। दिल्ली सरकार इस समय अपनी नई एक्साइज पॉलिसी पर काम कर रही है, जिसमें स्टेट एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है या रिटेल मार्जिन में बदलाव किया जा सकता है। अगर स्टेट लेवल पर टैक्स बढ़ते हैं, तो केंद्र द्वारा दी गई ड्यूटी में कटौती का फायदा पूरी तरह से खत्म हो सकता है।
इसके अलावा, एक्साइज कमिश्नर की नियुक्ति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी भी कीमतों के निर्धारण में एक बड़ी बाधा बनी हुई है। शराब कंपनियों के लिए यह नीतिगत बदलाव बेहद अहम है, क्योंकि रिटेल दाम कम होने से डिमांड और सेल्स वॉल्यूम में उछाल आ सकता है, लेकिन अगर लेवी (levies) बढ़ाई गई, तो रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
