Decathlon India अपने रिटेल फुटप्रिंट, टेक्नोलॉजी और लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए **€100 मिलियन** यानी करीब **₹850 करोड़** का बड़ा निवेश करने जा रही है। कंपनी के CEO शंकर चटर्जी (Sankar Chatterjee) का लक्ष्य **2030** तक टर्नओवर को दोगुना करके **₹5,000 करोड़** तक पहुंचाना और लोकल स्तर पर बने प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी बढ़ाकर **80%** करना है। यह रणनीति भारत में स्पोर्ट्स की बढ़ती मांग को पूरा करने पर केंद्रित है।
Decathlon Sports India ने CEO शंकर चटर्जी (Sankar Chatterjee) के नेतृत्व में एक बड़ी ग्रोथ स्ट्रैटजी का खुलासा किया है। कंपनी का लक्ष्य अगले पांच सालों में अपने बिजनेस को दोगुना करना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने के लिए, Decathlon €100 मिलियन (लगभग ₹850 करोड़) का भारी-भरकम निवेश कर रही है। इस फंड का इस्तेमाल स्टोरों की संख्या बढ़ाने, टेक्नोलॉजी सिस्टम को अपग्रेड करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने में किया जाएगा। फिलहाल, कंपनी 50 से ज्यादा शहरों में 132 से ज्यादा स्टोर चलाती है और करीब 5,400 लोगों को रोजगार देती है।
लोकल मैन्युफैक्चरिंग पर जोर
कंपनी की लॉन्ग-टर्म प्लानिंग का एक अहम हिस्सा 'मेक इन इंडिया' पहल को बढ़ावा देना है। वर्तमान में Decathlon India में बिकने वाले लगभग 60% प्रोडक्ट्स देश में ही बनते हैं। कंपनी का इरादा 2030 तक इस हिस्सेदारी को बढ़ाकर 75% से 80% तक ले जाना है। इस कदम से इंपोर्ट पर निर्भरता कम होगी और लागत में भी सुधार आएगा। Decathlon पहले से ही साइकिल और सिलिकॉन स्विमिंग एक्सेसरीज़ जैसे कई प्रोडक्ट्स का लोकल प्रोडक्शन कर रही है, जिससे देश के भीतर सप्लाई चेन को मैनेज करना आसान हो गया है।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और नए स्टोर फॉर्मेट
यह रिटेल दिग्गज अब छोटे, टेक्नोलॉजी-केंद्रित स्टोर फॉर्मेट्स, जैसे Decathlon Connect, पर फोकस कर रही है। इसका मकसद घनी आबादी वाले शहरी इलाकों में ग्राहकों तक पहुंच बनाना है। ऑनलाइन चैनल कंपनी के लिए एक बड़े रेवेन्यू स्रोत के रूप में उभरे हैं। 2018 में जहां ऑनलाइन सेल्स ₹27 करोड़ थी, वहीं आज यह ₹600 करोड़ से ज्यादा हो गई है। ऑनलाइन बिक्री अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 11% से 12% हिस्सा है, और इनकी डिलीवरी सर्विसेज़ पूरे भारत में लगभग 21,000 पिन कोड तक पहुंच चुकी हैं।
इंडस्ट्री ट्रेंड्स और भविष्य की राह
Decathlon की ग्रोथ प्लान्स भारत में स्पोर्ट्स में बढ़ती रुचि के साथ मेल खाती हैं। डेटा बताता है कि हाल के वर्षों में देश में स्पोर्ट्स एक्टिविटीज में हिस्सा लेने वालों की संख्या दोगुनी से ज्यादा हो गई है, जो अब आबादी का 12% है। घरेलू स्पोर्ट्स गुड्स मार्केट का वैल्यूएशन मौजूदा $6.7 बिलियन से बढ़कर 2030 तक $11 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है।
निवेशकों और इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों के लिए, यह देखना अहम होगा कि कंपनी अपने बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान्स को प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डाले बिना कैसे लागू करती है। साथ ही, लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाते हुए सप्लाई चेन की एफिशिएंसी बनाए रखना भी इस ग्रोथ स्ट्रेटेजी की सफलता में एक बड़ा फैक्टर साबित होगा। निवेशक इस बात पर भी गौर कर सकते हैं कि कंपनी नए फिजिकल स्टोर फॉर्मेट्स में अपने निवेश को, भारत के क्विक-कॉमर्स और ई-कॉमर्स सेक्टर्स के तेजी से हो रहे विकास के मुकाबले कैसे संतुलित करती है।
