Decathlon India अपने प्रीमियम रनिंग ब्रांड Kiprun के जरिए साल 2030 तक **₹1,000 करोड़** का रेवेन्यू हासिल करने की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी **100 मिलियन यूरो** का बड़ा निवेश कर रही है और देश में लोकल मैन्युफैक्चरिंग को और मजबूती दे रही है।
भारत में दौड़ रही है डिमांड
देश में रनिंग इवेंट्स का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। साल 2018 में जहां केवल 600 के करीब इवेंट्स होते थे, वहीं आज यह संख्या 2,000 के पार पहुंच गई है। इसी को भुनाने के लिए कंपनी ने Kiprun ब्रांड पर फोकस तेज कर दिया है, क्योंकि भारतीय ग्राहक अब प्रोफेशनल ग्रेड स्पोर्ट्स गियर की ओर रुख कर रहे हैं। मार्केट रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सेक्टर 2034 तक $4.9 बिलियन के आंकड़े तक पहुंच सकता है।
'मेक इन इंडिया' पर जोर
इस ग्रोथ को रफ्तार देने के लिए Decathlon भारत में 100 मिलियन यूरो का फ्रेश निवेश कर रही है। कंपनी का मौजूदा रेवेन्यू में 60% हिस्सा भारत में बनी चीजों से आता है, और उनके स्टोर में बिकने वाले फुटवियर में 50% हिस्सा भी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग का है। लोकल प्रोडक्शन से न केवल सप्लाई चेन बेहतर होगी, बल्कि लागत पर भी बेहतर कंट्रोल मिल सकेगा।
कड़ी प्रतिस्पर्धा
Decathlon के लिए चुनौती अब प्रीमियम सेगमेंट में खुद को साबित करने की है। यहाँ उसका मुकाबला Nike, Adidas और Puma जैसे ग्लोबल दिग्गजों से है। कंपनी की सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपने 'वैल्यू-फॉर-मनी' वाली इमेज को बरकरार रखते हुए प्रीमियम सेगमेंट में कैसे अपनी पकड़ मजबूत करती है।
तेजी से बढ़ता नेटवर्क
कंपनी का फिजिकल नेटवर्क भी तेजी से विस्तार कर रहा है। फिलहाल भारत में 132 स्टोर हैं और हर साल करीब 10 नए आउटलेट खोलने की योजना है। इसके अलावा, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए कंपनी 2 घंटे में डिलीवरी देने की सर्विस पर भी जोर दे रही है।
