Decathlon India अपने होलसेल कारोबार को रफ्तार दे रही है और इसका लक्ष्य **40,000** पार्टनर्स तक पहुंचना है। हालाँकि, फाइनेंशियल ईयर **2025** के नतीजों में कंपनी को **₹65 करोड़** का नेट लॉस हुआ है, जबकि रेवेन्यू **₹4,133 करोड़** रहा है।
स्पोर्ट्स रिटेल दिग्गज Decathlon Sports India अब आक्रामक रूप से अपने B2B होलसेल मार्केट को बड़ा करने में जुटी है। कंपनी का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों में अपने पार्टनर नेटवर्क को 40,000 तक ले जाने का है। पिछले पांच वर्षों में इस डिवीजन ने 20 गुना की जबरदस्त ग्रोथ दर्ज की है, जो अब कंपनी के कुल रेवेन्यू का लगभग 10% हिस्सा बन चुका है।
कारोबार की नई रणनीति
कंपनी की नजर अब एजुकेशनल संस्थानों, सरकारी विभागों और कॉर्पोरेट क्लाइंट्स पर है। कॉर्पोरेट गिफ्टिंग और वेलनेस किट्स की बढ़ती मांग को देखते हुए Decathlon, Government e-Marketplace (GeM) का भी पूरा इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, कंपनी टियर-II और टियर-III शहरों के छोटे रिटेलर्स के जरिए अपनी पैठ मजबूत करने की कोशिश में है।
घाटे के पीछे की असली वजह
हालांकि कंपनी का रेवेन्यू ₹4,133 करोड़ पर रहा, लेकिन बॉटम लाइन पर दबाव साफ दिखा। पिछले फाइनेंशियल ईयर में ₹197 करोड़ का मुनाफा कमाने वाली कंपनी इस बार ₹65 करोड़ के नेट लॉस में आ गई है। इसके पीछे मुख्य कारण प्रोक्योरमेंट, कर्मचारियों पर खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किए गए भारी निवेश हैं।
'मेक इन इंडिया' पर जोर
मार्जिन्स को सुधारने के लिए अब Decathlon ने लोकलाइजेशन की ओर कदम बढ़ाए हैं। कंपनी का टारगेट 2026 तक अपने 85% उत्पादों को भारत में ही सोर्स करने का है। यह कदम न केवल इम्पोर्ट पर निर्भरता कम करेगा बल्कि मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट को मैनेज करने में भी मददगार साबित होगा। देखना यह होगा कि क्या यह आक्रामक विस्तार आने वाले समय में कंपनी को वापस मुनाफे की राह पर ला पाता है या नहीं।
