Decathlon का भारत में बड़ा दांव: अगले 5 सालों में रेवेन्यू डबल करने की तैयारी, एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा

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AuthorAditya Rao|Published at:
Decathlon का भारत में बड़ा दांव: अगले 5 सालों में रेवेन्यू डबल करने की तैयारी, एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा

फ्रांस की स्पोर्ट्स रिटेलर Decathlon ने भारत में अपने बिजनेस को अगले पांच सालों में दोगुना करने का ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य ₹8,000 करोड़ से ज़्यादा का रेवेन्यू हासिल करना है। साथ ही, ग्लोबल सोर्सिंग में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाकर 15% करने और 2030 तक 200 स्टोर खोलने की योजना है।

भारत को ग्लोबल हब बनाने पर Decathlon का फोकस

Decathlon अब भारत पर अपना फोकस और भी तेज़ कर रही है। कंपनी भारत को मैन्युफैक्चरिंग, सोर्सिंग और प्रोडक्ट इनोवेशन के लिए एक प्रमुख ग्लोबल हब के तौर पर स्थापित करने की तैयारी में है। कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹4,182 करोड़ का रेवेन्यू दर्ज किया था और अब अगले पांच सालों में इसे दोगुना करने का अनुमान है। इस स्ट्रेटेजी में फिजिकल रिटेल स्टोर्स के विस्तार के साथ-साथ डिजिटल और क्विक-कॉमर्स स्पेस में अपनी मौजूदगी को मजबूत करना भी शामिल है।

लोकल मैन्युफैक्चरिंग और ग्लोबल सोर्सिंग का विस्तार

भारत में दो दशक से ज़्यादा समय से मैन्युफैक्चरिंग कर रही Decathlon, अभी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों के लिए करीब ₹5,500 करोड़ के गुड्स का उत्पादन करती है। कंपनी का एक बड़ा लक्ष्य यह भी है कि 2030 तक भारत में बेचे जाने वाले 80% से ज़्यादा प्रोडक्ट्स यहीं लोकल लेवल पर मैन्युफैक्चर हों। इससे सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स आसान होगी और करेंसी में उतार-चढ़ाव का असर भी कम होगा। इसके अलावा, Decathlon अगले पांच सालों में ग्लोबल सोर्सिंग में भारत का योगदान वर्तमान 9% से बढ़ाकर 15% करने की योजना बना रही है। कंपनी का मानना है कि भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच संभावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से इसे मदद मिल सकती है।

रिटेल नेटवर्क और बाज़ार का विस्तार

अपने रेवेन्यू लक्ष्यों को पाने के लिए, Decathlon अपने रिटेल स्टोर्स की संख्या में भी बड़ी बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है। वर्तमान में 136 आउटलेट्स की जगह, 2030 तक यह संख्या लगभग 200 तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस विस्तार की रणनीति में टियर II और टियर III शहरों पर खास ध्यान दिया जाएगा, जहाँ खेलकूद में बढ़ती रुचि को देखते हुए कंपनी को काफी संभावनाएं दिख रही हैं। कंपनी के डेटा के अनुसार, पिछले डेढ़ दशक में भारतीय आबादी में खेलकूद में हिस्सेदारी 5% से बढ़कर 12% हो गई है। अपनी रिसर्च और डेवलपमेंट, लोकल मैन्युफैक्चरिंग और मल्टी-चैनल रिटेल अप्रोच को मिलाकर, कंपनी स्थानीय जलवायु और इस्तेमाल की ज़रूरतों के हिसाब से स्पेशलाइज्ड फुटवियर और स्पोर्ट्स इक्विपमेंट जैसे प्रोडक्ट्स को तैयार करना चाहती है।

निवेशकों के लिए स्ट्रेटेजिक बातें

Decathlon की ग्रोथ की योजनाएं भारतीय बाज़ार के प्रति उनकी लंबी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। हालांकि, कंपनी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह छोटे शहरों में कॉम्पिटिटिव माहौल में ऑपरेशन का विस्तार करते हुए अपने प्रॉफिट मार्जिन को कैसे बनाए रख पाती है। लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और सप्लायर रिश्तों में लगातार निवेश की ज़रूरत होगी। साथ ही, क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन मार्केटप्लेस में आगे बढ़ते हुए, कंपनी को तेज़ डिलीवरी की उम्मीदों और स्पेशलाइज्ड स्पोर्ट्स गियर के टेक्निकल स्टैंडर्ड्स के बीच संतुलन बनाना होगा। निवेशकों को स्टोर्स के विस्तार की टाइमलाइन और 80% लोकल मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्य की प्रगति पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये मेट्रिक्स आने वाले सालों में कंपनी की लागत दक्षता और बाज़ार तक पहुँच को प्रभावित करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.