लाइफस्टाइल-टेक ब्रांड DailyObjects ने FY27 तक ₹400 करोड़ का नेट रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य रखा है। कंपनी अपनी ऑफलाइन मौजूदगी बढ़ाने के लिए 150 स्टोर खोलने की तैयारी में है। फिलहाल यह एक प्राइवेट कंपनी है और EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ रही है।
DailyObjects का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
लाइफस्टाइल और टेक्नोलॉजी एक्सेसरीज बनाने वाली प्राइवेट कंपनी DailyObjects ने साल 2027 तक ₹400 करोड़ का नेट रेवेन्यू कमाने का बड़ा ऐलान किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कंपनी अपनी ऑफलाइन रिटेल मौजूदगी को तेजी से बढ़ाएगी और 150 स्टोर खोलने की योजना बना रही है। यह कंपनी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड नहीं है, लेकिन FY25 में रिपोर्ट किए गए ₹111.2 करोड़ के रेवेन्यू से काफी ऊपर जाने की उम्मीद है।
आने वाले सालों में कमाई का अनुमान
कंपनी का मैनेजमेंट उम्मीद कर रहा है कि चालू फाइनेंशियल ईयर (FY26) तक रेवेन्यू ₹215 करोड़ से ₹220 करोड़ के बीच रहेगा। जहां कंपनी तेजी से अपना बिजनेस बढ़ा रही है, वहीं FY27 तक EBITDA प्रॉफिटेबिलिटी हासिल करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, FY25 में कंपनी को करीब ₹15.9 करोड़ का नेट लॉस हुआ था। इससे पता चलता है कि कंपनी फिलहाल बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रही है, बजाय तत्काल लाभ कमाने के।
ऑफलाइन रिटेल पर फोकस
इस ग्रोथ प्लान का एक अहम हिस्सा ऑफलाइन रिटेल का विस्तार है। वर्तमान में कंपनी के 13 एक्सक्लूसिव ब्रांड आउटलेट हैं, जिन्हें आने वाले सालों में बढ़ाकर 150 करने का लक्ष्य है। खुद के रिटेल स्टोर खोलकर, DailyObjects ऑनलाइन चैनलों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहती है, जिनसे फिलहाल अधिकांश बिक्री होती है। ब्रांड प्रीमियम ग्राहकों तक पहुंचने के लिए एयरपोर्ट जैसे हाई-ट्रैफिक वाले स्थानों को भी टारगेट कर रहा है।
प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी और मैन्युफैक्चरिंग
कंपनी की प्रोडक्ट स्ट्रेटेजी लाइफस्टाइल-टेक पोजिशनिंग पर आधारित है। यह अपने लगभग आधे प्रोडक्ट्स भारत में और बाकी चीन में मैन्युफैक्चर करती है। कंपनी अपने खास इकोसिस्टम, जैसे मॉड्यूलर चार्जिंग लाइन्स, के लिए डिजाइन और इंजीनियरिंग में लगातार निवेश कर रही है ताकि खुद को सस्ते विकल्पों से अलग कर सके।
व्यापारिक जोखिम और बाजार का माहौल
बड़े ऑफलाइन रिटेल नेटवर्क को चलाने में भारी कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत व्यय) और फिक्स्ड ऑपरेटिंग कॉस्ट (निश्चित परिचालन लागत) शामिल होती है, जो स्टोर-लेवल की प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखने में विफलता होने पर कैश फ्लो को प्रभावित कर सकती है। भारत में लाइफस्टाइल एक्सेसरीज सेगमेंट में काफी प्रतिस्पर्धा है, जिसमें स्थापित ग्लोबल ब्रांड्स और छोटे, फुर्तीले लोकल प्लेयर्स बाजार हिस्सेदारी के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।
चूंकि DailyObjects एक प्राइवेट कंपनी है, इसलिए यह अपने विकास को फंड करने और परिचालन घाटे को कवर करने के लिए बाहरी फंडिंग पर निर्भर करती है। कंपनी के लिए अगले महत्वपूर्ण कदम इस रिटेल स्टोर रोलआउट का सफल क्रियान्वयन और अपने प्रीमियम उत्पादों की मांग बनाए रखने की क्षमता होगी। आने वाले सालों में कंपनी अपनी आक्रामक भौतिक विस्तार को लाभप्रदता हासिल करने और बनाए रखने की आवश्यकता के साथ कैसे संतुलित करती है, इस पर विश्लेषक और हितधारक बारीकी से नजर रखेंगे।
