FMCG दिग्गज Dabur India के शेयर लुढ़ककर **₹393** के भाव पर आ गए हैं, जो पिछले साढ़े छह साल का निचला स्तर है। जून **2026** तिमाही में **10.6%** रेवेन्यू ग्रोथ के बावजूद रेगुलेटरी दिक्कतों और रूरल डिमांड में अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा डगमगाया हुआ है।
मुनाफे के बावजूद क्यों टूट रहा शेयर?
Dabur India के लिए जून 2026 तिमाही का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है। कंपनी ने 10.6% की रेवेन्यू ग्रोथ और 15% की बढ़ोतरी के साथ ₹591 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया है, जो पिछले 12 तिमाहियों में सबसे मजबूत है। लेकिन बाजार फिलहाल नतीजों से ज्यादा कंपनी के सामने खड़े रेगुलेटरी और ऑपरेशनल संकट पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
रेगुलेटरी और कानूनी चुनौतियां
कंपनी के लिए सबसे बड़ी सिरदर्दी जुलाई 2026 में शुरू हुई, जब US FDA ने सिल्वसा स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में डेटा इंटीग्रिटी को लेकर एक चेतावनी पत्र (Warning Letter) जारी किया। इसके अलावा, FSSAI के साथ भी उत्पादों के '100% नेचुरल' या 'प्योर' दावों को लेकर विवाद सामने आया। हालांकि दिल्ली हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर रोक लगा दी है, लेकिन इन घटनाओं से निवेशकों में कंपनी के अनुपालन और मार्केटिंग को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
बिजनेस सेगमेंट का हाल
कंपनी का घरेलू FMCG बिजनेस 9.5% बढ़ा है, जिसमें 5% वॉल्यूम ग्रोथ देखी गई। Badshah Masala के जुड़ने से फूड डिवीजन में 29.2% का उछाल आया है। दूसरी ओर, हेल्थकेयर और बेवरेज पोर्टफोलियो को बेमौसम बारिश की मार झेलनी पड़ी है।
लागत और आगे का रास्ता
महंगाई का असर लगातार मार्जिन पर पड़ रहा है। 'Project Samriddhi' के जरिए कंपनी एफिशिएंसी बढ़ाने की कोशिश कर रही है, लेकिन कृषि इनपुट और पैकेजिंग मैटेरियल की बढ़ती कीमतों ने मार्जिन और प्रोडक्ट की कीमत के बीच संतुलन बनाना कठिन कर दिया है। साथ ही, MENA क्षेत्र में जारी जियोपॉलिटिकल अस्थिरता एक्सपोर्ट रेवेन्यू के लिए जोखिम बनी हुई है। मैनेजमेंट का लक्ष्य FY27 तक डबल-डिजिट ग्रोथ का है, लेकिन निवेशकों की नजरें अब सिल्वसा प्लांट की समस्याओं के समाधान और रूरल डिमांड की रिकवरी पर टिकी हैं।
