Zappfresh का बड़ा दांव: FY28 तक ₹600 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य, रिटेल नेटवर्क होगा 500 स्टोर्स का

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Zappfresh का बड़ा दांव: FY28 तक ₹600 करोड़ रेवेन्यू का लक्ष्य, रिटेल नेटवर्क होगा 500 स्टोर्स का

Zappfresh की पेरेंट कंपनी DSM Fresh Foods अगले 4 सालों में अपना रेवेन्यू तिगुना कर ₹600 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। कंपनी का फोकस अपने एसेट-लाइट रिटेल नेटवर्क को 500 पार्टनर स्टोर्स तक बढ़ाने और एक्सपोर्ट्स को बढ़ावा देने पर है।

Zappfresh का बड़ा प्लान: 4 साल में तिगुना रेवेन्यू

Zappfresh की पेरेंट कंपनी DSM Fresh Foods ने एक बड़ा ऐलान किया है। कंपनी का लक्ष्य है कि FY28 तक वह अपना रेवेन्यू मौजूदा ₹220.8 करोड़ (FY26) से बढ़ाकर ₹600 करोड़ कर ले। यह ग्रोथ हासिल करने के लिए कंपनी ने दो मुख्य रणनीतियां बनाई हैं: अपने रिटेल फुटप्रिंट का विस्तार करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करना।

एसेट-लाइट मॉडल और एक्सपोर्ट पर जोर

डोमेस्टिक मार्केट में कंपनी एसेट-लाइट एक्सपेंशन मॉडल पर काम करेगी। इसका मतलब है कि कंपनी इस फाइनेंशियल ईयर में 500 नए पार्टनर-ओनड मीट शॉप्स खोलेगी। इन स्टोर्स को लोकल एंटरप्रेन्योर मैनेज करेंगे, जबकि Zappfresh सप्लाई चेन और ब्रांडिंग का सपोर्ट देगी। यह तरीका कंपनी को बिना ज्यादा कैपिटल इन्वेस्ट किए तेजी से आगे बढ़ने में मदद करेगा। वहीं, ग्लोबल लेवल पर कंपनी यूके, कनाडा, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे देशों में, खासकर फ्रोजन फूड प्रोडक्ट्स के लिए, ग्रोथ का टारगेट लेकर चल रही है।

इन चुनौतियों पर भी रहेगी नजर

हालांकि, कंपनी के ग्रोथ टारगेट काफी महत्वाकांक्षी हैं, लेकिन निवेशकों की नजरें कुछ अहम चुनौतियों पर भी होंगी। FY26 में DSM Fresh Foods ने ₹14.3 करोड़ का नेट प्रॉफिट और ₹31.1 करोड़ का EBITDA दर्ज किया था, जिसमें 69% की ग्रोथ देखी गई थी। लेकिन तेजी से बढ़ते स्केल के साथ इन आंकड़ों को बनाए रखना आसान नहीं होगा।

  • बढ़ता कर्ज (Rising Debt): कंपनी ऑपरेशन्स और Avyom Foodtech जैसे एक्विजिशन के लिए कर्ज ले रही है, जिस पर निवेशकों की खास नजर रहेगी।
  • मार्जिन पर दबाव: कंपनी के बिजनेस मिक्स में B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) का हिस्सा बढ़ रहा है, जबकि B2C (बिजनेस-टू-कंज्यूमर) से ज्यादा मार्जिन मिलता है। इस बदलाव से प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
  • वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट: कंपनी को पेमेंट मिलने में ज्यादा समय लग रहा है, जो वर्किंग कैपिटल पर दबाव डाल सकता है।
  • बढ़ती प्रतिस्पर्धा: फ्रेश फूड और मीट रिटेल सेक्टर में कॉम्पिटिशन बढ़ रहा है। Zappfresh को ऑर्गेनाइज्ड प्लेयर्स और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से मुकाबला करना होगा। इसके अलावा, रॉ मटेरियल की बढ़ती कीमतें भी मार्जिन पर असर डाल सकती हैं।

आगे क्या?

आने वाले समय में, कंपनी के लिए अपने डेट-टू-इक्विटी रेशियो को स्टेबल रखना और वर्किंग कैपिटल साइकिल को एफिशिएंटली मैनेज करना महत्वपूर्ण होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि नया पार्टनर-स्टोर मॉडल कितना सफल होता है और क्या यह उम्मीद के मुताबिक रेवेन्यू ला पाता है बिना लागत बढ़ाए। मार्जिन रिकवरी और इंटरनेशनल डिमांड के ट्रेंड्स पर कोई भी अपडेट कंपनी के FY28 टारगेट की राह में महत्वपूर्ण साबित होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.