शानदार रेवेन्यू और स्टोर ग्रोथ
Avenue Supermarts Ltd. (DMart) ने 31 मार्च, 2026 को समाप्त चौथी तिमाही और पूरे फाइनेंशियल ईयर के नतीजों का ऐलान किया है। कंपनी ने Q4 FY26 में ₹17,204.50 करोड़ का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹14,462.39 करोड़ से 19% ज्यादा है। इस तिमाही में DMart ने 58 नए स्टोर भी जोड़े, जिससे कुल स्टोर्स की संख्या बढ़कर 500 हो गई है। यह कंपनी के मजबूत विस्तार को दर्शाता है। कंपनी फिलहाल कोई डिविडेंड (Dividend) नहीं दे रही है।
मार्केट परफॉर्मेंस और एक्सपेंशन स्ट्रेटेजी
Q4 का यह प्रोविजनल रेवेन्यू फाइनेंशियल ईयर 2026 के लिए एक मजबूत क्लोजिंग दिखाता है, जिसमें पिछले साल की तुलना में 19% की वृद्धि दर्ज की गई है। 30 अप्रैल को Nifty 50 में 0.74% की गिरावट के बावजूद, Avenue Supermarts के शेयर ₹4,614 पर मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। इस साल अब तक (Year-to-date) शेयर में 24% से अधिक की तेजी आई है, जो बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद इसके ऑपरेशंस में निवेशकों के विश्वास को दिखाता है। इस तिमाही में 58 नए स्टोर का जुड़ना अब तक की सबसे तेज रफ्तार है, जो मार्केट शेयर पर कब्जा करने की कंपनी की रणनीति को उजागर करता है।
कॉम्पिटिटिव लैंडस्केप और DMart का वैल्यूएशन
DMart भारतीय रिटेल सेक्टर में काम करता है, जिसके 2034 तक USD 3,505.4 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, इस ग्रोथ के साथ-साथ ऑनलाइन रिटेलर्स, क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स और अन्य बड़े प्लेयर्स से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी है। Reliance Industries (P/E लगभग 23.7, मार्केट कैप ₹19 ट्रिलियन से ज्यादा) और Tata Consumer Products (P/E करीब 78.55) जैसे प्रतिस्पर्धियों के वैल्यूएशन स्तर अलग हैं। DMart का P/E रेशियो 104.50 है, जो इन साथियों और FMCG इंडस्ट्री के औसत 61.01 से काफी अधिक है। ऐतिहासिक रूप से, DMart की मजबूत अर्निंग ग्रोथ (पिछले 5 सालों में सालाना औसतन 17.3%) इसके प्रीमियम वैल्यूएशन को सही ठहराती रही है। हालांकि, अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या बढ़ती लागत और बढ़ी हुई प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह जारी रह सकता है।
मुख्य चुनौतियां और निवेशकों की चिंताएं
ग्रोथ के बावजूद, DMart को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसका P/E रेशियो लगभग 104.50 इसे Reliance (23.7) और Tata Consumer Products (78.55) की तुलना में एक महंगा स्टॉक बनाता है। एनालिस्ट्स बढ़ती प्रतिस्पर्धा, खासकर ऑनलाइन किराना सेवाओं से, और परफॉर्मेंस में अस्थिरता को मुख्य मुद्दे बता रहे हैं। आक्रामक तरीके से स्टोर जोड़ने से रेवेन्यू बढ़ता है, लेकिन ऑपरेटिंग और स्टाफिंग खर्चों में बढ़ोतरी से प्रॉफिट मार्जिन कम हो सकता है। चूंकि DMart कोई डिविडेंड नहीं देता, शेयरधारकों का रिटर्न पूरी तरह से शेयर की कीमतों में वृद्धि पर निर्भर करता है, जो मुश्किल बाजार में कम आकर्षक हो सकता है।
DMart और रिटेल सेक्टर का आउटलुक
आगे देखते हुए, एनालिस्ट्स के 12-महीने के प्राइस टारगेट Avenue Supermarts के लिए ₹4,500 से ₹5,200 तक हैं, कुछ तो ₹6,000 तक भी जा रहे हैं, जो संभावित बढ़त का संकेत देते हैं। हालांकि, कुछ एनालिस्ट्स 'HOLD' रेटिंग बनाए हुए हैं, जो आने वाली चुनौतियों का हवाला दे रहे हैं। शहरीकरण और डिजिटल ट्रेंड्स से भारतीय रिटेल मार्केट में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है। लेकिन, 2026 में ग्रोथ मार्जिन और हाई कॉम्पिटिशन पर केंद्रित रहने की संभावना है। DMart की भविष्य की सफलता लागतों को नियंत्रित करने, प्रतिस्पर्धा के बीच स्टोर्स को प्रोडक्टिव बनाए रखने और स्टोर विस्तार को लगातार मुनाफे में बदलने की इसकी क्षमता पर निर्भर करेगी।
