DMart (Avenue Supermarts) का बिजनेस मॉडल अपनी प्रॉपर्टी खुद खरीदने पर आधारित है, जो इसे रेंट के खर्चों से बचाता है। हालांकि, बढ़ते क्विक कॉमर्स (Quick Commerce) दौर में कंपनी के सामने अपनी 'एवरीडे लो प्राइस' स्ट्रेटजी को बनाए रखने की चुनौती है।
Avenue Supermarts का बिजनेस मॉडल रिटेल सेक्टर में सबसे अलग है। ज्यादातर कंपनियां स्टोर रेंट पर लेती हैं, लेकिन DMart अपनी प्रॉपर्टी खुद खरीदता है। इसका फायदा यह है कि कंपनी को रेंट के बढ़ते खर्चों की चिंता नहीं होती, लेकिन यह काफी Capital-intensive मॉडल है। प्राइम लोकेशन पर जमीन खरीदना बहुत महंगा हो गया है, ऐसे में कंपनी के लिए अपनी बैलेंस शीट को मजबूत रखते हुए विस्तार करना एक बड़ी चुनौती है।
क्विक कॉमर्स बनाम बल्क बाइंग
आजकल 'क्विक कॉमर्स' का बोलबाला है, जो कुछ ही मिनटों में सामान डिलीवर करने का वादा करते हैं। DMart की ताकत 'पेंट्री-लोडिंग' (भारी मात्रा में राशन खरीदना) है, जहां ग्राहक बचत के लिए बल्क में खरीदारी करते हैं। अभी बड़ा सवाल यह है कि क्या ये दोनों मॉडल एक साथ चल पाएंगे या क्विक कॉमर्स, बल्क बाइंग के बाजार में सेंध लगाएगा?
क्या है इन्वेस्टर्स के लिए देखने वाली बात?
DMart का असली मंत्र है Operating Efficiency। कंपनी विज्ञापन और सेल पर ज्यादा खर्च नहीं करती, ताकि ग्राहकों को सस्ते दाम दे सके। हालांकि, सैकड़ों लोकेशन पर इन्वेंट्री मैनेज करना बड़ी जिम्मेदारी है। अगर इन्वेंट्री टर्नओवर या ऑपरेशनल खर्चों में कोई भी गड़बड़ी हुई, तो मार्जिन पर दबाव आ सकता है।
इन्वेस्टर्स को आने वाले समय में Reliance Retail और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से मिलने वाली चुनौती पर नजर रखनी चाहिए। कंपनी अपनी एक्सपेंशन के लिए कितना कर्ज ले रही है और क्या वह अपने प्रॉफिट मार्जिन को बरकरार रख पाती है, यही उसके शेयर के लिए आगे का रास्ता तय करेगा।
