D2C Brands: फेस्टिव सीजन में बढ़ा कर्ज का बोझ, Quick Commerce के चक्कर में फंसा पैसा

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AuthorAditya Rao|Published at:
D2C Brands: फेस्टिव सीजन में बढ़ा कर्ज का बोझ, Quick Commerce के चक्कर में फंसा पैसा

फेस्टिव सीजन की तैयारियों के बीच Indian D2C ब्रांड्स ने अपना वर्किंग कैपिटल कर्ज **15-20%** तक बढ़ा दिया है। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर इन्वेंट्री बनाए रखने की होड़ में कंपनियां अब फिनटेक लेंडर्स का रुख कर रही हैं।

फेस्टिव सीजन के दौरान अपनी पहुंच बढ़ाने और 10-मिनट डिलीवरी के वादे को पूरा करने के चक्कर में D2C कंपनियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स जैसे Blinkit और Zepto के बढ़ते दबदबे के कारण अब ब्रांड्स को अपना स्टॉक शहर के सैकड़ों 'डार्क स्टोर्स' (Dark Stores) में फैलाना पड़ रहा है। इससे इन्वेंट्री का बड़ा हिस्सा इन छोटे सेंटर्स में ब्लॉक हो गया है, जिससे कंपनियों का कैश फ्लो दबाव में है।

कर्ज के लिए नए रास्ते

पारंपरिक बैंकों की सख्त शर्तों और कोलैटरल (Collateral) की मांग के कारण, नई कंपनियां अब 'रेवेन्यू-बेस्ड फाइनेंसिंग' (Revenue-based financing) का सहारा ले रही हैं। GetVantage और Recur Club जैसे फिनटेक प्लेटफॉर्म्स अब सेल्स डेटा के आधार पर लोन दे रहे हैं, जिससे कंपनियों को फौरन लिक्विडिटी मिल रही है।

रिस्क और चुनौतियां

बाजार में एक बड़ा रिस्क यह भी है कि शहरी खर्च में इस सीजन 6% तक की गिरावट देखी जा सकती है। महंगाई और बढ़ती ब्याज दरों के कारण मध्यम वर्ग के बजट पर असर पड़ा है। अगर उम्मीद के मुताबिक सेल्स नहीं हुई, तो ब्रांड्स का पैसा महंगा इन्वेंट्री में फंस जाएगा।

फिलहाल, कई D2C ब्रांड्स अब आक्रामक होने के बजाय रक्षात्मक रणनीति अपना रहे हैं। वे नए प्रोडक्ट्स के बजाय सिर्फ बेस्ट-सेलिंग आइटम्स पर ध्यान दे रहे हैं ताकि मार्जिन सुरक्षित रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.