Cloud kitchen की दिग्गज कंपनियां Curefoods और Rebel Foods ने FY26 में **20%** से ज्यादा रेवेन्यू ग्रोथ हासिल की है, लेकिन दोनों के प्रॉफिट का गणित बिल्कुल अलग दिशा में जाता दिख रहा है।
भारत के प्रमुख क्लाउड किचन ऑपरेटरों के लिए फाइनेंशियल ईयर 2026 के नतीजे सामने आए हैं। इन आंकड़ों से पता चलता है कि कैसे यह सेक्टर तेजी से बढ़ तो रहा है, लेकिन मुनाफे तक पहुंचने की दौड़ में कंपनियां अलग-अलग रणनीतियां अपना रही हैं।
Curefoods: विस्तार बनाम बढ़ता घाटा
Curefoods का ऑपरेशनल रेवेन्यू FY26 में ₹916 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹746 करोड़ से 23% अधिक है। हालांकि, टॉप-लाइन में ग्रोथ के बावजूद कंपनी का घाटा 13% बढ़कर ₹192 करोड़ हो गया है, जो पिछले साल ₹170 करोड़ था। कंपनी का कुल खर्च ₹1,127 करोड़ रहा, जिसका बड़ा हिस्सा कच्चा माल, स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर के डेप्रिसिएशन में गया। कंपनी अभी 70 शहरों में 500 से ज्यादा किचन चला रही है और Krispy Kreme के राइट्स के साथ ऑफलाइन डाइनिंग में भी उतर चुकी है। गौर करने वाली बात यह है कि SEBI से मंजूरी मिलने के बावजूद, कंपनी ने अपने ₹800 करोड़ के IPO को फिलहाल टाल दिया है।
Rebel Foods: बेहतर होती दक्षता
दूसरी ओर, Rebel Foods ने ऑपरेशनल एफिशिएंसी की ओर कदम बढ़ाए हैं। कंपनी का रेवेन्यू 20.7% बढ़कर ₹1,952 करोड़ रहा (पिछले साल ₹1,617 करोड़)। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी ने अपने नेट लॉस को 16% कम करने में कामयाबी पाई है। अब यह घाटा घटकर ₹282 करोड़ रह गया है, जो पिछले साल ₹337 करोड़ था। कंपनी का कुल खर्च ₹2,266 करोड़ तक पहुंचा, जिसका कारण लॉजिस्टिक्स और फूड कॉस्ट का बढ़ना रहा है। Faasos और Behrouz Biryani जैसे 20 से ज्यादा ब्रांड्स के साथ, Rebel Foods का विस्तार अब 10 देशों तक पहुंच चुका है।
फूड-टेक सेक्टर की चुनौतियां
क्लाउड किचन मॉडल बहुत ज्यादा कैपिटल मांगता है। इन दोनों कंपनियों के नतीजे दिखाते हैं कि सेक्टर में 'बर्न रेट' मैनेज करना कितना मुश्किल है। जहां Curefoods अपने नेटवर्क के विविधीकरण पर जोर दे रही है, वहीं Rebel Foods का फोकस यूनिट इकोनॉमिक्स को सुधारकर इंटरनेशनल मार्केट में अपनी जगह पक्की करने पर है। निवेशकों की नजर अब इस पर होगी कि क्या ये कंपनियां आने वाली तिमाहियों में अपने खर्चों पर काबू पाकर सस्टेनेबल मार्जिन दिखा पाती हैं या नहीं।
