Crompton Greaves Consumer Electricals ने अगले 5 सालों में अपना रेवेन्यू दोगुना करके ₹15,000 करोड़ तक पहुंचाने का बड़ा लक्ष्य रखा है। कंपनी सोलर और वायर्स जैसे नए सेगमेंट में विस्तार करने की योजना बना रही है। कंपनी पर अब कोई कर्ज नहीं है, लेकिन निवेशकों की चिंताएं बनी हुई हैं। हालिया तिमाही नतीजों के बाद लाइटिंग बिजनेस में मार्जिन पर दबाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों ने शेयर की चाल को प्रभावित किया।
अगले 5 साल में ₹15,000 करोड़ के पार, Crompton Greaves का बड़ा प्लान
Crompton Greaves Consumer Electricals Ltd (CGCEL) ने लंबी अवधि का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। कंपनी अगले पांच सालों में अपने रेवेन्यू को दोगुना कर ₹15,000 करोड़ तक ले जाने की तैयारी में है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए, कंपनी अपनी रणनीति को प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर मोड़ रही है और साथ ही हाई-ग्रोथ वाले क्षेत्रों जैसे सोलर रूफटॉप, सोलर पंप, रेजिडेंशियल वायर्स और वाटर प्यूरीफायर में कदम रख रही है। कंपनी के मैनेजमेंट का कहना है कि इस विस्तार के बाद, उनका कुल एड्रेसेबल मार्केट (TAM) करीब ₹1.6 लाख करोड़ हो गया है, जो उनके पारंपरिक फैन और किचन एप्लायंसेज के बिजनेस से काफी बड़ा है।
मजबूत फाइनेंशियल पोजीशन और जीरो-डेट स्टेटस
कंपनी ने जून तिमाही (Q1 FY27) में ₹2,235 करोड़ का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 11.8% अधिक है। वहीं, नेट प्रॉफिट में 15.2% की बढ़ोतरी के साथ यह ₹143 करोड़ रहा। कंपनी की बैलेंस शीट के लिए एक बड़ी सकारात्मक बात यह है कि नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) का भुगतान करने के बाद कंपनी अब 'जीरो-डेट' पोजीशन में आ गई है। यह फाइनेंशियल मजबूती कंपनी को अपने नए प्रोडक्ट कैटेगरी में रिसर्च और इनोवेशन के लिए अधिक निवेश करने की छूट देती है।
शेयर में गिरावट, मार्जिन पर दबाव और सप्लाई चेन की चिंताएं
लंबी अवधि के ग्रोथ टारगेट के बावजूद, कंपनी के शेयर में हाल ही में उथल-पुथल देखने को मिली है। Q1 FY27 के नतीजे आने के बाद 7 अगस्त, 2026 को शेयर में लगभग 7.4% की तेज गिरावट आई। इस गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों की चिंताएं रहीं, खासकर कंपनी के B2B (बिजनेस-टू-बिजनेस) लाइटिंग सेगमेंट में प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव को लेकर।
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर की अन्य कंपनियों की तरह, Crompton भी इनपुट कॉस्ट में महंगाई (inflationary pressures) से जूझ रही है। कंपनी ने कुछ लागतें ग्राहकों पर डालने की कोशिश की है, लेकिन बाकी का बोझ उठाने से प्रॉफिट मार्जिन सिकुड़ गया है। इसके अलावा, कंपनी को सप्लाई चेन में अनिश्चितताओं जैसी परिचालन संबंधी बाधाओं (operational headwinds) का भी सामना करना पड़ रहा है, जिसने उत्पादन और सेल्स वॉल्यूम को कभी-कभी बाधित किया है। निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कंपनी पर पिछले सालों के टैक्स और जीएसटी की बकाया मांगें भी लंबित हैं, जो संभावित रेगुलेटरी चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।
आगे क्या देखें?
भविष्य में, कंपनी की नई पहलों को सफलतापूर्वक बढ़ाने की क्षमता, विशेष रूप से सोलर रूफटॉप बिजनेस, जो वर्तमान में लगभग ₹500 करोड़ के ऑर्डर बुक के साथ खड़ा है, निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र होगा। Butterfly एप्लायंसेज ब्रांड का इंटीग्रेशन, जिसे कंपनी अगले तीन से पांच वर्षों में राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना चाहती है, भी ग्रोथ स्ट्रेटेजी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहेगा। जैसे-जैसे कंपनी आगामी त्योहारी सीजन में प्रवेश कर रही है, बाजार प्रतिभागी यह आंकलन करेंगे कि क्या बढ़ी हुई मांग जारी लागत दबाव की भरपाई कर सकती है और मार्जिन को आरामदायक स्तर पर वापस ला सकती है।
