ग्लोबल फुटवियर ब्रांड Crocs ने भारत को अपने 'Tier-1' प्रायोरिटी मार्केट का दर्जा दिया है। कंपनी अब भारत में मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाकर इसे ग्लोबल एक्सपोर्ट हब बनाएगी और अपने स्टोर्स की संख्या **300** के पार ले जाएगी।
ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की नई भूमिका
Crocs ने भारत को चीन और जापान जैसे प्रमुख बाजारों की कतार में खड़ा करते हुए इसे अपने ग्रोथ प्लान का केंद्र बना दिया है। कंपनी की रणनीति केवल भारत में माल बेचने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को एक मजबूत एक्सपोर्ट हब के रूप में तैयार करना है। फिलहाल, भारत में स्थित 5 पार्टनर-ऑपरेटेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के जरिए कंपनी 85 देशों में अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर रही है। यह कदम सप्लाई चेन के जोखिम को कम करने और ग्लोबल स्तर पर आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
रिटेल विस्तार और नई रणनीति
कंपनी अपने रिटेल नेटवर्क को आक्रामक रूप से बढ़ा रही है। इस साल 20 नए स्टोर्स खुलने के साथ ही भारत में कुल स्टोरों की संख्या 300 के पार पहुँच गई है। Crocs अब हाइब्रिड मॉडल अपना रही है, जिसमें पार्टनर-लेड स्टोर्स के साथ-साथ कंपनी खुद के 'कंपनी-ओन्ड' स्टोर्स भी खोलेगी, जिसकी शुरुआत ग्रेटर नोएडा से हो चुकी है। इसका मुख्य फोकस अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में पकड़ मजबूत करने के साथ-साथ बैग्स जैसे लाइफस्टाइल एक्सेसरीज के जरिए रेवेन्यू के नए स्रोत तलाशना है।
चुनौतियां और जोखिम
विकास की इन योजनाओं के बीच कंपनी के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। साल 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार, टैरिफ और कमजोर थोक बाजार के कारण मार्जिन पर दबाव देखा गया है। भारत के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी फुटवियर बाजार में अपनी प्रॉफिटेबिलिटी बनाए रखना कंपनी के लिए बड़ी परीक्षा होगी। साथ ही, पार्टनर-रन मैन्युफैक्चरिंग मॉडल में क्वालिटी कंट्रोल और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को बनाए रखना भी कंपनी के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।
