भारत बना Crocs का नया फोकस, पर क्यों गिरी सेल्स?
Crocs Inc. अपनी ग्लोबल स्ट्रैटेजी को भारत पर केंद्रित कर रही है और देश को एक 'टियर-वन' प्रायोरिटी मार्केट बना रही है। कंपनी का मानना है कि भारत उसकी लंबी अवधि की ग्रोथ का इंजन है और सप्लाई चेन के लिए भी अहम है। Crocs ब्रांड की प्रेसिडेंट, ऐनी मेल्मन (Anne Mehlman) ने भारत के बढ़ते महत्व पर जोर दिया है।
लेकिन, इन रणनीतिक कदमों के बावजूद, फाइनेंशियल ईयर 2025 (जो मार्च 2025 में समाप्त हुआ) में कंपनी के भारतीय ऑपरेशंस में गिरावट देखी गई। सेल्स 7% घटकर ₹558 करोड़ रह गई, और नेट प्रॉफिट 37% लुढ़क कर ₹16.2 करोड़ पर आ गया। यह स्थिति कंपनी के ग्लोबल इंटरनेशनल बिजनेस से बिल्कुल अलग है, जहां इसी फाइनेंशियल ईयर की चौथी तिमाही में 11% की ग्रोथ दर्ज की गई थी। फरवरी 2026 तक, Crocs का मार्केट कैप लगभग $4.86 बिलियन के आसपास था। हालांकि, कंपनी के स्टॉक पर वैल्यूएशन का दबाव बना हुआ है, जिसके P/E रेशियो फरवरी 2026 में 7.79 से लेकर 29.8 तक थे, और कुछ नकारात्मक आंकड़े भी थे। 25 फरवरी 2026 को स्टॉक $93.38 और $96.00 के बीच ट्रेड कर रहा था, जबकि 52-हफ्ते की रेंज $73.21 से $122.84 थी।
मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर भारत
Crocs भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को भी बढ़ा रही है, जो इसकी ग्लोबल स्ट्रैटेजी का एक अहम हिस्सा है। कंपनी ने 2023 से भारत में अपनी फैक्ट्रियों की संख्या 2 से बढ़ाकर 5 कर ली है। इसका मकसद सिर्फ घरेलू बाजार की मांग को पूरा करना नहीं, बल्कि लगभग 85 अन्य देशों को भी सप्लाई करना है। यह कदम ग्लोबल टैरिफ की अस्थिरता और सोर्सिंग में बदलावों से बचने की एक रणनीति है। भारत, चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया में मौजूद फैक्ट्रियों के साथ, Crocs के लिए एक महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है।
रिटेल में विस्तार और मल्टी-सिटी स्ट्रैटेजी
Crocs ने अपैरल ग्रुप (Apparel Group) और मेट्रो ब्रांड्स (Metro Brands) के साथ मिलकर अपने रिटेल फुटप्रिंट को बढ़ाया है। कंपनी के अब 300 से ज्यादा मोनो-ब्रांडेड स्टोर्स हैं। आने वाले समय में इन स्टोर्स की संख्या तेजी से बढ़ाने की योजना है, खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों पर ज्यादा फोकस रहेगा, जहां पिछले साल टियर-1 शहरों की तुलना में सेल्स ग्रोथ ज्यादा देखी गई थी। कंपनी ऑनलाइन और ऑफलाइन चैनल्स को इंटीग्रेट करके एक मजबूत ओमनीचैनल (Omnichannel) प्रेजेंस बनाना चाहती है।
वैल्यूएशन और कॉम्पिटिशन पर पैनी नजर
Crocs का वैल्यूएशन कुछ प्रमुख कॉम्पिटिटर्स की तुलना में ज्यादा दिख रहा है। उदाहरण के लिए, Skechers का P/E रेशियो लगभग 14.41 है, जो Crocs से काफी कम है। वहीं, Adidas और Nike जैसे ग्लोबल स्पोर्ट्सवियर ब्रांड्स के P/E रेशियो क्रमशः 24.26 और 38.25 हैं। भारत में, मेट्रो ब्रांड्स और रिलैक्सो फुटवियर्स (Relaxo Footwears) जैसे लोकल प्लेयर्स के P/E रेशियो 50 से भी ऊपर हैं, जो भारतीय बाजार में निवेशक के बढ़ते भरोसे को दिखाते हैं।
भारतीय फुटवियर मार्केट में जबरदस्त ग्रोथ की उम्मीद है, जिसके 2034 तक $47.53 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 9.7% के CAGR से बढ़ेगा। लेकिन, Crocs की खुद की FY25 की परफॉर्मेंस दिखाती है कि अभी बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने का काफी अवसर है। एनालिस्ट्स की राय मिश्रित है; 'होल्ड' (Hold) की सलाह के साथ-साथ 'सेल' (Sell) रेटिंग्स भी बढ़ी हैं। फरवरी 2026 तक, कंसेंसस प्राइस टारगेट घटकर लगभग $103.42 रह गया है, जो एक साल पहले $143.53 था।
चिंताएं और आगे का रास्ता
Crocs का मार्केट कैप पिछले पांच सालों में -10.06% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से घटा है। अस्थिर P/E रेशियो भविष्य की प्रॉफिटेबिलिटी को लेकर अनिश्चितता का संकेत देते हैं। ब्रांड को अभी भी अपनी 'मून शू' वाली इमेज से पूरी तरह बाहर निकलना है, जो फैशन और फंक्शन को महत्व देने वाले बाजार में उसके आकर्षण को सीमित कर सकता है। इसके अलावा, कॉम्पिटिशन बहुत कड़ा है।
एनालिस्ट्स ने Crocs स्टॉक के लिए $99.00 का मीडियन 12-महीने का प्राइस टारगेट दिया है, जो मौजूदा स्तरों से लगभग 9.36% की मामूली बढ़त का संकेत देता है। एनालिस्ट्स की राय में अंतर है; कुछ 'सेल' या 'होल्ड' की सलाह दे रहे हैं, जबकि अन्य 'बाय' (Buy) रेटिंग दे रहे हैं। यह दिखाता है कि कंपनी भारत जैसे बाजारों में ग्रोथ के अवसरों का फायदा उठाने और वैल्यूएशन के दबाव से निपटने में कितनी सफल होगी, यह उसके भविष्य के स्टॉक परफॉर्मेंस के लिए महत्वपूर्ण होगा।