अर्बन कंजम्पशन में **4%** की गिरावट के बाद अब रिटेल दिग्गज Tier-2 और Tier-3 शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। Titan, Nykaa और Amazon जैसे बड़े प्लेयर्स अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं, लेकिन निवेशकों को मुनाफे पर इसके असर को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है।
भारत के कंज्यूमर गुड्स और रिटेल सेक्टर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रमुख मेट्रो शहरों में मांग घटने के कारण कंपनियां अब अपना पूरा फोकस Tier-2 और Tier-3 शहरों पर शिफ्ट कर रही हैं। साल 2026 की पहली तिमाही में अर्बन कंजम्पशन में 4% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके चलते ब्रांड्स अपनी सेल्स वॉल्यूम बनाए रखने के लिए छोटे बाजारों का सहारा ले रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश
नई मांग को भुनाने के लिए कंपनियां लॉजिस्टिक्स और अपने फिजिकल स्टोर्स के नेटवर्क को मजबूत कर रही हैं। Amazon India ने अपनी स्टोरेज कैपेसिटी को 64 मिलियन क्यूबिक फीट तक बढ़ा लिया है और वे साल 2026 के अंत तक 300 शहरों तक अपनी क्विक-कॉमर्स सर्विस पहुंचाने की तैयारी में हैं। वहीं, Nykaa भी आक्रामक रुख अपनाते हुए साल 2030 तक 600 से ज्यादा आउटलेट्स खोलने का लक्ष्य लेकर चल रही है। डेटा के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 में D2C ब्रांड्स के करीब 66% नए ऑर्डर्स छोटे शहरों से ही आए हैं।
क्या निवेशकों के लिए जोखिम है?
छोटे शहरों में विस्तार का मतलब है भारी शुरुआती खर्च (Capex), जैसे कि लीज, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और सप्लाई चेन लॉजिस्टिक्स। एक बड़ी चुनौती यह है कि छोटे शहरों में 'टिकट साइज' (प्रति ट्रांजैक्शन खर्च) मेट्रो शहरों के मुकाबले काफी कम होता है। इसके अलावा, महंगाई के कारण कंज्यूमर अब 'डाउनट्रेडिंग' कर रहे हैं, यानी वे सस्ते और कम मार्जिन वाले प्रोडक्ट्स चुन रहे हैं। यह स्थिति ऑपरेटिंग मार्जिन पर दबाव डाल सकती है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
आने वाले समय में निवेशकों के लिए 'सेम-स्टोर ग्रोथ' और नई सप्लाई चेन की कार्यक्षमता सबसे महत्वपूर्ण होगी। नजर इस बात पर रखनी होगी कि क्या छोटे शहरों से आने वाला रेवेन्यू, विस्तार के भारी खर्चों की भरपाई कर पाएगा? साथ ही, क्या कंपनियां बिना डिस्काउंट या प्रमोशनल ऑफर्स के मार्जिन बनाए रख पाएंगी, यह देखना काफी दिलचस्प होगा।
