कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बहार! AC की ताबड़तोड़ बिक्री से Q1 में **20%** ग्रोथ की उम्मीद

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में बहार! AC की ताबड़तोड़ बिक्री से Q1 में **20%** ग्रोथ की उम्मीद

गर्मी का मौसम कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के लिए खुशखबरी लेकर आया है! उम्मीद है कि जून तिमाही में इस सेक्टर का रेवेन्यू पिछले साल की तुलना में **20%** से ज़्यादा बढ़ेगा। इसकी मुख्य वजह एयर कंडीशनर्स (AC) की ज़बरदस्त मांग है। हालांकि, बढ़ती रॉ मैटेरियल कॉस्ट और करेंसी में उतार-चढ़ाव कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रहे हैं।

AC की बंपर बिक्री से सेक्टर में तेजी

भारतीय कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में मांग में ज़बरदस्त तेज़ी देखी जा रही है। अनुमान है कि जून 2026 को खत्म होने वाली तिमाही में सेक्टर का रेवेन्यू पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 20% से ज़्यादा बढ़ सकता है। इस शानदार ग्रोथ का सबसे बड़ा श्रेय लगातार लंबी और भीषण गर्मी को जाता है, जिसने कूलिंग अप्लायंसेज की मांग को आसमान पर पहुंचा दिया है।

खास तौर पर एयर कंडीशनर्स (AC) इस सेक्टर के ग्रोथ इंजन बनकर उभरे हैं। उम्मीद है कि AC की बिक्री में 30% से ज़्यादा का उछाल देखने को मिलेगा। इसके अलावा, टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, पंखे और किचन के दूसरे सामानों जैसे घरेलू उपकरणों में भी अच्छी डबल-डिजिट ग्रोथ दर्ज की गई है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि पिछले साल इसी तिमाही में बेमौसम बारिश के कारण मांग कमजोर थी, इसलिए इस बार के आंकड़े तुलनात्मक रूप से बेहतर दिख रहे हैं।

घरेलू उपकरणों की पैठ और बिक्री के आंकड़े

कूलिंग प्रोडक्ट्स के बाज़ार में ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं। भारत में फिलहाल केवल 13% घरों में AC है, ऐसे में लोगों की बढ़ती आमदनी और शहरीकरण के साथ इस सेक्टर में लंबी अवधि में बड़े विस्तार की गुंजाइश है। इस मांग का असर बड़े प्लेयर्स पर भी दिख रहा है। Voltas जैसी कंपनियां मौजूदा फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में ही दस लाख (1 Million) से ज़्यादा AC बेचने का बड़ा मुकाम हासिल कर चुकी हैं।

मुनाफे पर दबाव के कारण

बिक्री की ज़बरदस्त रफ्तार के बावजूद, कंपनियां मुनाफे को लेकर दबाव महसूस कर रही हैं। स्टील, कॉपर और एल्युमिनियम जैसे ज़रूरी कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के कारण कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर असर पड़ रहा है। ऊपर से, ग्लोबल फ्रेट रेट्स का बढ़ना और डॉलर के मुकाबले रुपए का कमजोर होना, इंपोर्टेड कंपोनेंट्स की लागत को और बढ़ा रहा है।

इन बढ़ती लागतों से निपटने के लिए, कई बड़ी कंपनियों ने 5% से 8% तक दाम बढ़ा दिए हैं। लेकिन, इंडस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, ये बढ़ोतरी प्रोडक्शन कॉस्ट में हुई करीब 13% की महंगाई को पूरी तरह से कवर नहीं कर पा रही है। वहीं, रेफ्रिजरेटर जैसे प्रोडक्ट्स की ग्रोथ थोड़ी धीमी रही क्योंकि इनकी मांग मौसम पर कम निर्भर करती है। हालांकि, Godrej Enterprises जैसी कंपनियां इस सेगमेंट में इंडस्ट्री के औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं।

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