बाजार में मची उथल-पुथल के बीच विदेशी निवेशकों (FPIs) ने कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर पर बड़ा दांव लगाया है। FY27 में इस सेक्टर में **₹9,901 करोड़** का निवेश आया है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
विदेशी निवेशकों का भरोसा और सेक्टर की मजबूती
जहां इस साल भारतीय शेयर बाजार से कुल ₹3.07 ट्रिलियन की निकासी हुई है, वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर ने इस गिरावट के विपरीत जाकर मजबूती दिखाई है। विदेशी निवेशकों ने इस क्षेत्र में ₹9,901 करोड़ का नेट इन्फ्लो (Inflow) किया है, जिससे साफ है कि वे ग्लोबल कमोडिटी अस्थिरता के बजाय घरेलू ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा कर रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा है निवेशकों का इंटरेस्ट?
इस सेक्टर की ग्रोथ के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- प्रीमियमाइजेशन: आय बढ़ने के साथ लोग महंगे और बेहतर प्रोडक्ट्स चुन रहे हैं।
- हाउसिंग मार्केट का सहारा: प्रॉपर्टी मार्केट में तेजी का सीधा असर अप्लायंस सेल्स पर दिख रहा है।
- लो पेनिट्रेशन: रूम एयर कंडीशनर्स की पेनिट्रेशन दर अभी 10% से कम है, जो भविष्य में ग्रोथ की बड़ी संभावनाएं खोलती है।
- सरकारी नीतियां: पर्सनल इनकम टैक्स रिलीफ और जीएसटी (GST) रैशनलाइजेशन ने लोगों की खर्च करने योग्य आय (Disposable Income) को सपोर्ट दिया है।
चुनौतियां और जोखिम
सेक्टर में सब कुछ शानदार नहीं है। बढ़ते इनपुट कॉस्ट के कारण कंपनियों को अपने प्रोडक्ट्स की कीमतों में 4% से 10% तक की बढ़ोतरी करनी पड़ी है। इसी चिंता के चलते पिछले एक महीने में Nifty Consumer Durables इंडेक्स 6% करेक्ट हो चुका है।
क्या फेस्टिव सीजन में टिकेगी डिमांड?
Kotak Institutional Equities के मुताबिक, रूम एसी के वॉल्यूम में दूसरी तिमाही में 15% से 20% की बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन असली परीक्षा तीसरी तिमाही की होगी। निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनियां बढ़ती कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी या फिर महंगी कीमतों के कारण फेस्टिव डिमांड पर ब्रेक लग जाएगा। यदि वॉल्यूम में मजबूती बनी रहती है, तो यह सेक्टर निवेशकों के लिए 'गोल्ड माइन' साबित हो सकता है।
