महंगाई की मार अब कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों पर भी पड़ रही है। TTK Prestige, Stove Kraft और Hawkins Cookers जैसी दिग्गज कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ाने जा रही हैं। इसका मुख्य कारण एल्युमीनियम, प्लास्टिक और पैकेजिंग जैसे रॉ मटेरियल (Raw Material) की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी है।
क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
भारत में कंज्यूमर ड्यूरेबल सेक्टर की कंपनियां, जो अब तक बढ़ी हुई लागत को खुद झेल रही थीं, अब ग्राहकों पर बोझ डालने का फैसला कर रही हैं। एल्युमीनियम, प्लास्टिक और पैकेजिंग मटेरियल जैसी जरूरी चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिसके चलते कंपनियों की प्रॉफिट मार्जिन (Profit Margin) पर दबाव आ गया है।
कौन-कौन सी कंपनियां कर रही हैं दाम बढ़ाने की तैयारी?
किचन अप्लायंसेज और कुकवेयर बनाने वाली बड़ी कंपनियां इस ट्रेंड में सबसे आगे हैं। TTK Prestige और Stove Kraft ने पहले ही कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत दिया है या इसे लागू कर दिया है। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि आने वाले त्योहारी सीजन (Festive Season) से पहले कंपनियां ग्राहकों को खोना नहीं चाहतीं। यह उनके लिए मार्जिन बचाने और ग्राहकों को बनाए रखने के बीच एक नाजुक संतुलन बनाने जैसा है।
पहली तिमाही के नतीजे क्या कहते हैं?
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही के नतीजे बताते हैं कि कंपनियां किस दबाव से गुजर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Hawkins Cookers का रेवेन्यू (Revenue) 33.1% बढ़कर ₹318.1 करोड़ रहा, और नेट प्रॉफिट (Net Profit) 17.1% बढ़कर ₹30.4 करोड़ हुआ। लेकिन, इसके बावजूद कंपनी का EBITDA मार्जिन 180 बेसिस पॉइंट कम हो गया। इससे पता चलता है कि बिक्री बढ़ने के बावजूद, रॉ मटेरियल की लागत प्रॉफिट को कैसे कम कर सकती है। इसी तरह, TTK Prestige का रेवेन्यू 34% और Stove Kraft का नेट प्रॉफिट 63.57% बढ़ा, लेकिन यह बढ़ोतरी भी बढ़ती लागतों को संभालने की चुनौती से जूझ रही है।
आगे क्या हो सकता है?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में बढ़ोतरी का यह फैसला कितना सफल होगा, यह ग्राहकों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। जुलाई 2026 तक खुदरा महंगाई दर 4.45% है, ऐसे में लोगों के बजट पर पहले से ही दबाव है। अगर घरेलू उपकरणों की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ीं, तो मांग में कमी आ सकती है, खासकर ऐसी चीजों पर जो लोग टाल सकते हैं।
कंपनियां प्रोडक्शन और सप्लाई चेन को बेहतर बनाकर लागत का बोझ कम करने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन, ग्लोबल मार्केट में एनर्जी और मेटल जैसी चीजों की कीमतों में अनिश्चितता बनी हुई है।
निवेशकों को अब वॉल्यूम ग्रोथ (Volume Growth) पर नजर रखनी होगी। अगर कंपनियां दाम बढ़ाकर भी यूनिट बिक्री बनाए रखने में कामयाब रहती हैं, तो यह उनकी ब्रांड वैल्यू और प्राइसिंग पावर को दिखाएगा। इसके विपरीत, अगर ऊंची कीमतों से बिक्री घटती है, तो मार्जिन पर और दबाव आ सकता है।
